नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र भले ही आखिरी दिन विपक्ष और पक्ष के हंगामे के चलते समय से पहले स्थगित हो गया, लेकिन इस बार का सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक बन गया। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार वक्फ संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में बिना किसी व्यवधान के इतनी लंबी और गंभीर चर्चा देखी गई—राज्यसभा में 17 घंटे 2 मिनट, जबकि लोकसभा में 13 घंटे 13 मिनट की निरंतर बहस।
यह रिकॉर्ड 1981 में हुई 15 घंटे 51 मिनट की सबसे लंबी चर्चा को भी पीछे छोड़ गया। ऐसे में यह सत्र सिर्फ विधायी कामकाज का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद और मर्यादाओं का प्रतीक बन गया।
लोकतंत्र का उत्सव बना संसद सत्र
सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे “लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि तीन अप्रैल को सुबह 11 बजे शुरू हुई राज्यसभा की बैठक चार अप्रैल की तड़के 4:02 बजे तक लगातार चली, जो संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व है।
स्पीकर और सभापति ने सराहा सहयोगपूर्ण वातावरण
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस सत्र की उत्पादकता 118 प्रतिशत रही, जिसमें कुल 16 विधेयक पारित किए गए। 31 जनवरी से 4 अप्रैल तक चले इस सत्र में लोकसभा की 26 बैठकें हुईं, जो कुल मिलाकर 160 घंटे 48 मिनट तक चलीं।
वहीं, राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने इसे “संवाद और साझा उद्देश्य का आईना” बताते हुए कहा कि सत्र विधायी उपलब्धियों और एकता की भावना के लिए याद किया जाएगा।
थैंक्सगिविंग और बजट चर्चा भी बनी मिसाल
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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर 17 घंटे 23 मिनट की चर्चा हुई, जिसमें 173 सांसदों ने भाग लिया।
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आम बजट पर सामान्य चर्चा 16 घंटे 13 मिनट तक चली, जिसमें 169 सांसद शामिल हुए।
अंत में हंगामा, लेकिन उपलब्धियां ऐतिहासिक
हालांकि, सत्र के अंतिम दिन विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच हुए भारी हंगामे के चलते कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा। लेकिन इससे पहले जो विमर्श और कार्य हुआ, वह भारतीय संसदीय इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।