आव्रजन और विदेशी विधेयक 2025’ संसद से पारित, फर्जी वीजा-पासपोर्ट पर 7 साल की जेल और 10 लाख जुर्माना

 

 

 

पीटीआई: भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, ठहरने और निगरानी को सख्त बनाने वाला ‘आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025’ बुधवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया। इससे पहले, यह विधेयक 27 मार्च को लोकसभा में पारित किया गया था। विपक्षी दलों द्वारा सुझाए गए संशोधनों को खारिज करने के बाद इसे ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।

क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान?

फर्जी वीजा और पासपोर्ट पर सख्त सजा: यदि कोई व्यक्ति जाली दस्तावेजों के जरिए भारत में प्रवेश करता है या देश छोड़ता है, तो उसे सात साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

विदेशियों पर कड़ी निगरानी: होटल, विश्वविद्यालय, अस्पताल और अन्य संस्थानों को विदेशी नागरिकों की जानकारी देना अनिवार्य होगा, ताकि ओवरस्टे (अवधि से अधिक रुकने) वाले विदेशियों पर नजर रखी जा सके।

राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता: राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल विदेशियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

संसद में गरमाई बहस, विपक्ष ने किया वाकआउट

विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कांग्रेस और तृणमूल सरकारों पर अवैध प्रवासियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और राशन कार्ड में अवैध प्रवासियों के नाम जोड़कर उन्हें सुविधाएं दी गईं। इस पर कांग्रेस और तृणमूल सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन से वाकआउट कर दिया।

‘विधेयक से विदेशियों को अपराधी समझने का संदेश’ – सिंघवी

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने विधेयक को अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसे स्थायी समिति को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक निम्न अधिकारियों को अत्यधिक शक्तियां देता है और इसमें अपील और जवाबदेही की प्रक्रिया का अभाव है।

सरकार का पक्ष: शिक्षा, शोध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी क़ानून

गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक शिक्षा, शोध और आर्थिक विकास के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों का स्वागत करता है, लेकिन राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को भी सुनिश्चित करता है।

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