वायनाड में 10 दिन से चला रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त, सेना के साहस को सलाम कर स्थानीय लोगों ने दी भावपूर्ण विदाई

वायनाड में चल रहे 10 दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन का शनिवार को समापन हो गया। सेना के साहस और समर्पण को देखकर स्थानीय लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सैनिकों को भावपूर्ण विदाई दी। इस त्रासदी में 400 से अधिक लोगों की जान गई थी, और भारतीय सेना ने कठिन हालातों के बीच अद्वितीय बहादुरी दिखाते हुए बचाव कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

PRO ने साझा किया सैनिकों का सम्मान

कोच्चि रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (PRO) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि सैनिकों को उनके आवास से बाहर निकलते समय स्थानीय लोगों ने तालियों के साथ सम्मानित किया। प्रादेशिक सेना की 122 वीं इन्फैंट्री बटालियन के जवानों को माउंट टैबोर स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी सम्मानित किया, जहां बचाव दल ठहरे थे।

https://x.com/DefencePROkochi/status/1821485343499043126

सेना के बलिदान को नमन

कोच्चि रक्षा PRO ने इस भावुक क्षण को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, “हम अपने बहादुर सैनिकों के प्रति अत्यंत आभारी हैं जिन्होंने भूस्खलन बचाव अभियान के दौरान अपनी जान जोखिम में डाल दी। उनके साहस और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।”

विदाई के दौरान स्थानीय लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘भारतीय सेना की जय’ के नारे लगाकर सैनिकों का उत्साहवर्धन किया। वायनाड जिला प्रशासन ने भी सेना के जवानों के लिए एक विशेष विदाई समारोह का आयोजन किया, जिसमें बचाव और खोज अभियान में शामिल जवानों का आभार प्रकट किया गया।

स्थानीय और क्षेत्रीय समर्थन ने किया सफल अभियान

कर्नल परमवीर सिंह नागरा ने ANI को बताया कि यह अभियान मेजर जनरल मैथ्यू के नेतृत्व में स्थानीय लोगों और प्रशासन के सहयोग से सफल हुआ। स्वयंसेवकों की कोई कमी नहीं थी, और न केवल वायनाड बल्कि केरल, तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से लोग आए और सेना की सहायता की।

 
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