AI में निवेश के बीच Microsoft का बड़ा फैसला, 60 हजार कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का विकल्प

 

 

 

  • भारत समेत चार देशों में लागू होगा Voluntary Exit Offer
  • पात्र कर्मचारियों को आर्थिक सहायता और करियर प्लानिंग की सुविधा

नई दिल्ली : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने करीब 60 हजार कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया है। यह संख्या कंपनी के वैश्विक कार्यबल का लगभग 27 प्रतिशत है। इस योजना में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के चुनिंदा विभागों के पात्र कर्मचारी शामिल होंगे। कंपनी ने 26 अक्टूबर को इसकी घोषणा की। नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होंगे कर्मचारी

माइक्रोसॉफ्ट ने इस योजना को Voluntary Exit Offer (VEO) नाम दिया है। इसका मतलब है कि पात्र कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया जा रहा है, न कि सभी 60 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का ऐलान किया गया है।

कंपनी की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी एमी कोलमैन के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों को आर्थिक सहायता और करियर संबंधी संसाधनों के साथ कंपनी से बाहर नए अवसर तलाशने का विकल्प देना है। साथ ही, इससे कंपनी की अलग-अलग इकाइयों को बदलती व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार अपने कार्यबल में बदलाव करने में मदद मिलेगी। 

भारत के करीब 23 हजार कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

माइक्रोसॉफ्ट के भारत में लगभग 23 हजार कर्मचारी हैं। हालांकि, इनमें से कितने कर्मचारी इस योजना के लिए पात्र होंगे, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

यह योजना अमेरिका, भारत, ब्रिटेन और कनाडा में चुनिंदा टीमों के कर्मचारियों के लिए है। कंपनी के आंतरिक पद-स्तर 70 और उससे नीचे के पात्र कर्मचारी इसमें शामिल हो सकते हैं। कुछ विभागों और टीमों को इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। पात्र कर्मचारियों को उनके व्यक्तिगत ऑफर की जानकारी ईमेल के माध्यम से दी जानी है। 

कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना के तहत कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने पर आर्थिक पैकेज, स्वास्थ्य बीमा और करियर परिवर्तन से जुड़ी सहायता मिल सकती है। भुगतान की शर्तें कर्मचारी के पद-स्तर, सेवा अवधि और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

भारत में पात्र कर्मचारियों के लिए निर्णय लेने की समयसीमा 1 दिसंबर बताई गई है। हालांकि, कर्मचारियों को मिलने वाले अंतिम लाभ और उनकी पात्रता की पुष्टि व्यक्तिगत ऑफर की शर्तों से ही होगी। 

AI पर बढ़ते खर्च के बीच क्यों अहम है यह फैसला?

माइक्रोसॉफ्ट अपने क्लाउड कंप्यूटिंग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही है। डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और AI सेवाओं में बढ़ते निवेश के बीच कंपनी अपने कार्यबल और व्यावसायिक प्राथमिकताओं को भी नए सिरे से व्यवस्थित कर रही है।

हालांकि, कंपनी ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में इस योजना को बदलती व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप कार्यबल में लचीलापन लाने की पहल बताया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी 60 हजार पद केवल AI के कारण खत्म किए जा रहे हैं।

क्या AI से भविष्य में नौकरियां कम होंगी?

AI के कारण रोजगार में बदलाव की आशंकाएं लगातार बढ़ रही हैं। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की Future of Jobs Report 2025 के मुताबिक, तकनीकी बदलाव, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य वैश्विक रुझानों के कारण 2030 तक दुनिया में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां विस्थापित हो सकती हैं। इसी अवधि में करीब 17 करोड़ नए रोजगार भी पैदा होने का अनुमान है। यानी रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर लगभग 7.8 करोड़ नौकरियों की शुद्ध वृद्धि संभव है।

इससे स्पष्ट होता है कि AI का असर केवल नौकरियां खत्म होने तक सीमित नहीं है। कुछ कामों की मांग घट सकती है, जबकि AI, डेटा, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसका वास्तविक असर कर्मचारियों के कौशल, कंपनियों की रणनीति और नई नौकरियों के निर्माण पर निर्भर करेगा।

आगे क्या?

माइक्रोसॉफ्ट के इस फैसले पर अब नजर रहेगी कि कितने पात्र कर्मचारी स्वेच्छा से कंपनी छोड़ने का विकल्प चुनते हैं और इसका कंपनी के रोजगार ढांचे पर क्या असर पड़ता है। भारत में भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किन विभागों के कर्मचारियों को ऑफर मिलता है।

यह फैसला टेक इंडस्ट्री में बदलते रोजगार परिदृश्य की एक अहम कड़ी है। लेकिन 60 हजार कर्मचारियों की पात्रता को 60 हजार नौकरियों के खत्म होने के बराबर समझना सही नहीं होगा।

 

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