देहरादून: उत्तराखंड में सहकारिता प्रणाली को सशक्त और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई प्रभावी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि MPACS (बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों) को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित किया जाए और उन्हें एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जोड़ा जाए, ताकि लाभार्थियों को अधिक विकल्प और एकीकृत सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकें।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगी सहकारिता सेवाएं
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सहकारी योजनाओं की कंप्यूटरीकरण प्रक्रिया और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन को जल्द पूरा किया जाए। इससे राज्य के नागरिकों को कृषि, ऋण, विपणन और स्वरोजगार जैसी योजनाओं का लाभ एक ही डिजिटल माध्यम से सहज रूप से मिल सकेगा।
नवाचार और नाबार्ड से सहयोग पर बल
उन्होंने कहा कि संचालित योजनाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जाए और MPACS को एपीओ (एग्रीकल्चर प्रोडक्शन ऑर्गनाइजेशन) के रूप में विकसित करने हेतु नाबार्ड का सहयोग प्राप्त किया जाए।
कृषकों और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा ऋण और सुविधाएं
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 672 MPACS और 331 सहकारी बैंक शाखाओं के माध्यम से अल्पकालीन और मध्यकालीन ऋण वितरण में तेजी लाई जाए। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों को भी इस प्रणाली से जोड़ा जाए, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो।
समीक्षा में प्रमुख योजनाओं की प्रगति प्रस्तुत
विभागीय अधिकारियों ने अवगत कराया कि:
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दीन दयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत अब तक
11 लाख से अधिक लाभार्थियों और 6,190 स्वयं सहायता समूहों को ₹6747.64 करोड़ का ऋण वितरित किया जा चुका है। -
वित्तीय वर्ष 2024-25 में अल्पकालीन ₹1706 करोड़ और मध्यकालीन ₹445 करोड़ ऋण वितरण का लक्ष्य।
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13513 मी.टन उर्वरक वितरण और 266 मी.टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित।
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स्टेट मिलेट मिशन योजना के तहत 31716 क्विंटल मंडुवा की खरीद कर
₹13.59 करोड़ का भुगतान किया गया। -
मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के तहत अब तक
60 हजार मी.टन पशुआहार वितरित कर 52 हजार से अधिक लाभार्थियों को लाभ। -
मोटरसाइकिल टैक्सी योजना में अब तक
309 लाभार्थियों को ₹3.86 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण वितरित।
नवाचार और सेवा एकीकरण से सहकारिता का नया युग
मुख्य सचिव ने कहा कि सहकारिता विभाग को आधुनिक तकनीक, नवाचार और एकीकृत योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है। उन्होंने सभी योजनाओं के भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन को नियमित रूप से मॉनिटर करने और जनपदवार क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा सहकारिता को कृषक हित, स्वरोजगार और ग्रामीण समृद्धि के केंद्र में रखकर संचालित की जा रही योजनाएं ग्राम्य अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। MPACS को डिजिटल प्लेटफॉर्म और एनआरएलएम से जोड़ने की यह पहल राज्य के सहकारी ढांचे को सशक्त और समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
