धरती के आर-पार गुजरने वाले ‘भूत कण’ ने दिलाया नोबेल, जानिए फ्रांसिस हैल्जेन की खोज की कहानी

 

 

 

नई दिल्ली : कल्पना कीजिए कि हर सेकंड खरबों बेहद छोटे कण आपके शरीर से होकर गुजर रहे हों और आपको इसका जरा भी एहसास न हो। यही न्यूट्रिनो हैं—ऐसे कण जो पदार्थ के साथ बेहद कम प्रतिक्रिया करते हैं और अंतरिक्ष की दूर-दराज की घटनाओं की जानकारी अपने साथ पृथ्वी तक ला सकते हैं।

इन्हीं रहस्यमयी कणों को समझने और पकड़ने के लिए किए गए काम ने वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिलाया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 6 अक्टूबर को उन्हें IceCube Neutrino Observatory में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए सम्मानित किया।

कौन हैं फ्रांसिस हैल्जेन?

बेल्जियम में जन्मे फ्रांसिस हैल्जेन लंबे समय से कण भौतिकी और न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान पर काम कर रहे हैं। वह अमेरिका की University of Wisconsin–Madison में भौतिकी के प्रोफेसर हैं और IceCube Neutrino Observatory के Principal Investigator हैं। उन्होंने 1972 में UW–Madison के भौतिकी विभाग से जुड़कर अपने वैज्ञानिक करियर का बड़ा हिस्सा वहीं बिताया।

हैल्जेन की खासियत यह थी कि उन्होंने न्यूट्रिनो को पकड़ने के लिए किसी पारंपरिक प्रयोगशाला के बजाय दक्षिणी ध्रुव की विशाल बर्फ को ही डिटेक्टर के तौर पर इस्तेमाल करने का विचार आगे बढ़ाया।

आखिर न्यूट्रिनो है क्या?

न्यूट्रिनो को वैज्ञानिक अक्सर बेहद मुश्किल से पकड़े जाने वाले ‘घोस्ट पार्टिकल’ यानी भूत कण कहते हैं।

ये लगभग बिना द्रव्यमान वाले और विद्युत आवेश रहित कण हैं। न्यूट्रिनो तारों और ब्रह्मांड की बेहद ऊर्जावान घटनाओं में बन सकते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में न्यूट्रिनो लगातार पृथ्वी और हमारे शरीर से गुजरते रहते हैं।

यही गुण इन्हें वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। प्रकाश या आवेशित कॉस्मिक किरणों के मुकाबले न्यूट्रिनो अपने स्रोत से पृथ्वी तक लगभग बिना बाधा पहुंच सकते हैं।

एक किलोमीटर बर्फ के नीचे छिपी है विशाल वेधशाला

यहीं से शुरू होती है IceCube की कहानी।

दक्षिणी ध्रुव में करीब एक घन किलोमीटर बर्फ के भीतर हजारों प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं। जब कोई हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु के कण से टकराता है, तो उससे पैदा होने वाले आवेशित कण बेहद हल्की नीली रोशनी पैदा कर सकते हैं। IceCube के सेंसर इस रोशनी को रिकॉर्ड करते हैं और उसके आधार पर न्यूट्रिनो की दिशा और ऊर्जा का अनुमान लगाया जाता है।

यानी जिस बर्फ को सामान्य तौर पर सिर्फ जमी हुई पानी की परत माना जाता है, उसी के भीतर वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड को देखने वाला दुनिया का सबसे अनोखा डिटेक्टर तैयार कर दिया।

2013 में खुली नई खिड़की

IceCube ने 2013 में सौर मंडल के बाहर से आने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो का पहला प्रत्यक्ष पता लगाने की घोषणा की। इस उपलब्धि ने खगोल विज्ञान में एक नए दौर की शुरुआत की, जिसमें ब्रह्मांड को सिर्फ प्रकाश के जरिए नहीं बल्कि न्यूट्रिनो जैसे कणों के जरिए भी पढ़ा जाने लगा।

इसके बाद सितंबर 2017 में IceCube ने एक हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो को एक दूर स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल से जुड़े स्रोत की दिशा से जोड़ने में मदद की। बाद के अध्ययनों में सक्रिय आकाशगंगाओं और हमारी Milky Way से हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो उत्सर्जन के संकेत भी मिले।

ब्रह्मांड को समझने का तरीका बदल गया

इस खोज का महत्व सिर्फ एक नए कण को पकड़ने तक सीमित नहीं है।

हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं और अन्य अत्यधिक ऊर्जावान अंतरिक्षीय स्रोतों में कणों को इतनी ज्यादा ऊर्जा कैसे मिलती है।

आवेशित कॉस्मिक किरणों के रास्ते चुंबकीय क्षेत्र बदल सकते हैं, लेकिन न्यूट्रिनो सामान्यतः सीधी दिशा में यात्रा करते हैं। इसलिए उनका रास्ता वैज्ञानिकों को उस जगह की ओर संकेत दे सकता है जहां वे पैदा हुए थे।

सिर्फ अंतरिक्ष नहीं, धरती के अंदर भी काम आएंगे

न्यूट्रिनो की मदद से वैज्ञानिक सिर्फ अंतरिक्षीय घटनाओं का अध्ययन नहीं कर रहे। पृथ्वी के भीतर से गुजरने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो के व्यवहार का अध्ययन करके वैज्ञानिक पृथ्वी के अंदर मौजूद पदार्थ और उसके वितरण के बारे में भी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

यही वजह है कि IceCube को केवल एक अंतरिक्ष वेधशाला के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह कण भौतिकी, खगोल विज्ञान और भू-विज्ञान के बीच एक नया वैज्ञानिक रास्ता खोल रहा है।

‘रोशनी’ से आगे अब कणों से ब्रह्मांड की पढ़ाई

फ्रांसिस हैल्जेन और IceCube की कहानी यह बताती है कि ब्रह्मांड को समझने के लिए सिर्फ दूरबीन से आने वाली रोशनी को देखना जरूरी नहीं है। अंतरिक्ष की बेहद शक्तिशाली घटनाओं से निकलने वाले न्यूट्रिनो भी अपने स्रोत की कहानी पृथ्वी तक पहुंचा सकते हैं।

दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में छिपे हजारों सेंसर अब उन ‘भूत कणों’ को पकड़ रहे हैं, जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर की घटनाओं के संदेश लेकर आते हैं। इसी नए नजरिए को आगे बढ़ाने के लिए फ्रांसिस हैल्जेन को 2026 का भौतिकी नोबेल मिला है।

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