देहरादून: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसी बीच उत्तराखंड भाजपा ने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाता सूची की पारदर्शिता से जोड़कर कई सवाल उठाए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में कहा कि मृतक, डुप्लीकेट या दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नामों का सत्यापन और सुधार मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ऐसे नामों को हटाए जाने का विरोध क्यों कर रही है।
‘डुप्लीकेट और शिफ्टेड नामों पर आपत्ति क्यों?’
महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि कोई मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुका है या किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है तो उसका सत्यापन जरूरी है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची से गलत या दोहराए गए नाम हटाने की प्रक्रिया पर आपत्ति का कारण कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस से यह भी सवाल किया कि सत्यापन के दौरान जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम मतदाता सूची में क्यों बने रहने चाहिए।
बिना दस्तावेज फर्जी वोटर बनाने का आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यदि कोई व्यक्ति बिना वैध दस्तावेज के फर्जी मतदाता बनाने की कोशिश करता है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कांग्रेस के SIR विरोध को इसी संदर्भ में सवालों के घेरे में रखा।
भट्ट ने कहा कि भाजपा पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची के पक्ष में है और चुनाव प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं का सही रिकॉर्ड होना जरूरी है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के आरोप पर भी निशाना
महेंद्र भट्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव ज्ञानेश कुमार के CEC बनने से पहले हो चुका था, इसलिए उन्हें उस चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचाने का जिम्मेदार ठहराना तर्कसंगत नहीं है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला, जबकि 2024 का लोकसभा चुनाव इससे पहले पूरा हो चुका था। हालांकि वे मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त के रूप में आयोग का हिस्सा थे।
भाजपा ने कांग्रेस से मांगे सबूत
भट्ट ने कहा कि यदि कांग्रेस को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली या SIR को लेकर गंभीर आपत्ति है तो उसे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत सामने रखने चाहिए और जरूरत पड़ने पर न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए।
यह विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। SIR की वैधता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचे हैं। सितंबर में शीर्ष अदालत ने CEC ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी।
SIR पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी
SIR को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और उन्होंने CEC के इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा SIR को मतदाता सूची में डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान तथा सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के रूप में पेश कर रही है।
ऐसे में मतदाता सूची का पुनरीक्षण अब चुनावी राजनीति के साथ-साथ निर्वाचन प्रक्रिया, दस्तावेजी सत्यापन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

