नेपाल में अचानक क्यों आई इतनी भीषण बाढ़? ग्लेशियर टूटने से मची तबाही, 1500 से ज्यादा लापता

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TMP : नेपाल-चीन सीमा पर बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। नेपाल में मृतकों की संख्या 547 तक पहुंचने की खबर है, जबकि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और राहत-बचाव अभियान के बीच संख्या लगातार बदल रही है।

ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही की पूरी कड़ी

चीन ने शुक्रवार को शुरुआती विशेषज्ञ आकलन के आधार पर कहा कि नेपाल में ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर के टूटने से यह भीषण आपदा शुरू हुई। वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक बर्फ, चट्टानों और मलबे के बड़े हिस्से के नदी क्षेत्र में गिरने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ। इसके बाद बने अस्थायी प्राकृतिक बांध के टूटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर बह निकला।

सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में भी ग्लेशियर और चट्टानी हिस्से के बड़े पैमाने पर ढहने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना केवल सामान्य बाढ़ नहीं थी, बल्कि बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी के एक साथ तेज बहाव ने इसे बेहद विनाशकारी बना दिया।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में मची तबाही

बाढ़ का तेज बहाव नेपाल के रसुवा क्षेत्र से नीचे की ओर बढ़ा और भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र में भारी तबाही हुई। कई पुल, सड़कें और दूसरी आधारभूत संरचनाएं बह गईं। चीन की ओर भी ग्यिरोंग क्षेत्र और सीमा के आसपास बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

आपदा के बाद ऊपरी हिस्से में बने दो जलाशय जैसी झीलों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इनमें से एक के बढ़ने और अस्थिर होने की आशंका के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। बाद में स्थिति को नियंत्रित मानते हुए अभियान दोबारा शुरू किया गया।

क्या यह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड थी?

शुरुआती तौर पर आशंका थी कि ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी ग्लेशियर झील के अचानक फटने से बाढ़ आई होगी। लेकिन उपलब्ध सैटेलाइट विश्लेषण और विशेषज्ञ आकलन में ग्लेशियर/चट्टान के ढहने, मलबे के नदी में गिरने और उसके बाद अचानक प्राकृतिक बांध टूटने की प्रक्रिया ज्यादा संभावित बताई जा रही है। इसलिए घटना को सिर्फ सामान्य GLOF कहना अभी जल्दबाजी होगी।

चीन में भी सैकड़ों लोग लापता

चीन ने बताया है कि तिब्बत के प्रभावित क्षेत्र में 5 लोगों की मौत हुई है और 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। चीन के अनुसार प्रभावित ग्यिरोंग काउंटी से 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

भारतीय भी बड़ी संख्या में लापता

नेपाल में लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो नेपाल के रास्ते तिब्बत की यात्रा या कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर थे। आंकड़ों का सत्यापन अभी जारी है।

हिमालय के लिए बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले पर्वतीय ढलानों की अस्थिरता ऐसी घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है। हालांकि इस विशेष आपदा को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के लिए अभी विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

नेपाल और चीन में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। लेकिन तबाह हो चुके सड़क मार्गों, पुलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव दलों के लिए लापता लोगों तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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