भारतीय सेना के ‘चार पैरों वाले सैनिक’ अब भरेंगे आसमान से उड़ान, कॉम्बैट डॉग्स की नई ट्रेनिंग

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सेना के अनुसार, यह अभ्यास एयरबोर्न ऑपरेशन में सैन्य कुत्तों की क्षमताओं को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह जंप पहले किए गए फ्री-फॉल अभ्यासों पर आधारित है और सैनिक तथा कॉम्बैट डॉग के बीच तालमेल को परखता है।

जमीन से आसमान तक: कॉम्बैट डॉग्स की सैन्य भूमिका

भारतीय सेना में कॉम्बैट डॉग्स का इस्तेमाल लंबे समय से तलाशी, ट्रैकिंग, विस्फोटकों की पहचान और आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जाता है। उनकी सूंघने की क्षमता संदिग्ध इलाकों, इमारतों और संभावित ठिकानों की जांच में सैनिकों की मदद करती है।

प्रशिक्षित कुत्ते इंसानी गंध, हथियारों और विस्फोटकों का पता लगाने तथा मुश्किल इलाकों में ट्रैकिंग करने में सक्षम होते हैं। ऐसे अभियानों में वे सैनिकों को संभावित खतरे की जानकारी जुटाने में सहायता दे सकते हैं।

पैराशूट ट्रेनिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

एयरबोर्न ऑपरेशन के दौरान सैनिकों को ऐसे स्थानों तक पहुंचना पड़ सकता है, जहां सामान्य रास्तों से पहुंचना कठिन होता है। कॉम्बैट डॉग और उसका हैंडलर यदि इस तरह की तैनाती के लिए प्रशिक्षित हों, तो जमीन पर उतरने के बाद डॉग की सर्च और ट्रैकिंग क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालिया जंप में पैराट्रूपर, डॉग हैंडलर और कॉम्बैट डॉग ने एक साथ पैराशूट से उतरने का अभ्यास किया। सेना ने इसे इस तरह की शुरुआती टैंडेम डिसेंट घटनाओं में से एक बताया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सैन्य अभियान में डॉग्स को पैराशूट के जरिए उतारा जाएगा, बल्कि यह एक विशेष परिचालन क्षमता का प्रशिक्षण है।

सूर्य कमांड क्या है?

सूर्य कमांड भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड है, जिसका मुख्यालय लखनऊ में है। यह कमांड सेना के केंद्रीय क्षेत्र से जुड़े अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है।

टायसन: गोली लगने के बाद भी जारी रखा मिशन

फरवरी 2026 में 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज से जुड़े कॉम्बैट डॉग टायसन ने किश्तवाड़ में आतंकवाद विरोधी अभियान में भूमिका निभाई थी। रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध आतंकवादी ठिकाने की ओर बढ़ते समय उसके पैर में गोली लगी, लेकिन वह आगे बढ़ता रहा और सैनिकों को संदिग्ध आतंकवादियों की स्थिति का पता लगाने में मदद की। टायसन को उसके साहस और अभियान में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

चार पैरों वाले सैनिकों की बदलती भूमिका

कॉम्बैट डॉग्स अब केवल जमीन पर तलाशी और ट्रैकिंग तक सीमित प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं। सूर्य कमांड का एयरबोर्न अभ्यास दिखाता है कि सेना सैन्य कुत्तों और उनके हैंडलर्स को अधिक चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए तैयार करने पर भी काम कर रही है। यह क्षमता सैनिकों और प्रशिक्षित डॉग्स के बीच भरोसे, समन्वय और विशेष प्रशिक्षण पर आधारित है।

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