नेपाल में 3 दिन बाद भी थमी नहीं तबाही, 977 लोगों की तलाश; सीमा पार जमा पानी ने बढ़ाई चिंता

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TMP: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के तीन दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। राहत एजेंसियां मलबे और नदी किनारे लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं, जबकि कई प्रभावित इलाकों तक सड़क संपर्क टूटने के कारण हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू किया जा रहा है। इसी बीच तिब्बत की तरफ पानी जमा होने की खबर ने भोटेकोशी नदी के आसपास एक नए खतरे की आशंका बढ़ा दी है।

नेपाल पुलिस, सेना और सशस्त्र पुलिस बल बड़े पैमाने पर अभियान में जुटे हैं। 4,400 से ज्यादा पुलिसकर्मी सर्च ऑपरेशन में लगाए गए हैं। नुवाकोट, रसुवा और धाडिंग में अब तक 1,473 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

बाढ़ की चपेट में आए रसुवा से 117 विदेशी पर्यटकों को भी निकाला गया है। इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 अमेरिकी और 2 इतालवी नागरिक शामिल हैं। तीन अन्य पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा रही है।

इस आपदा के बाद एक और बड़ी समस्या सामने आई है—बरामद शवों को रखने और उनकी पहचान करने की। चितवन में 186 शव मिलने के बाद अस्पतालों की मौजूदा क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। प्रशासन को वैकल्पिक इमारतों को अस्थायी शवगृह के तौर पर इस्तेमाल करना पड़ा है। नवलपरासी पूर्व समेत दूसरे जिलों में भी शवों को रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।

पहचान की प्रक्रिया में पुलिस शवों की तस्वीरें और फिंगरप्रिंट जुटा रही है। जिन मामलों में पहचान मुश्किल है, वहां डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। निचले इलाकों में तलाशी बढ़ने के साथ ऐसे शवों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

आपदा का सबसे बड़ा मानवीय आंकड़ा अब भी लापता लोगों का है। NDRRMA के मुताबिक 977 लोग लापता हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल पुलिस के 28 जवान भी अब तक लापता बताए गए हैं।

अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक मौतों की संख्या 538 हो चुकी है। रसुवा में हुई तबाही का असर भोटेकोशी और त्रिशुली नदी प्रणाली के जरिए दूर तक गया, जिसके कारण नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, तनहुन, चितवन और नवलपरासी में भी शव और मानव अवशेष बरामद किए गए हैं।

इस बीच नेपाल-चीन सीमा पर स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। तिब्बत में नदियों के संगम के पास बनी अवरोधक झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा होने का अनुमान लगाया गया था। चीन के मुताबिक इसमें और पानी बढ़ने की संभावना थी। ऐसे में नेपाल में भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ने की चिंता बनी हुई है।

नेपाल सरकार प्रभावित लोगों और कारोबारियों के लिए राहत एवं पुनर्वास पैकेज तैयार कर रही है। प्रधानमंत्री और मंत्रियों ने राहत कोष में एक महीने का वेतन देने का फैसला किया है। भारत की ओर से भी अतिरिक्त राहत सामग्री भेजी जा रही है, जबकि अमेरिका ने 5 लाख डॉलर की सहायता घोषित की है।

यानी नेपाल में बचाव अभियान जारी है, लेकिन चुनौती अब सिर्फ मलबे में फंसे लोगों को निकालने तक सीमित नहीं है—लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान और संभावित नए जलप्रवाह से सुरक्षा, तीनों मोर्चे एक साथ खुले हुए हैं।

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