हल्द्वानी: राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के मौके पर उत्तराखण्ड में खेल शिक्षा और प्रशिक्षण को नई दिशा देने की पहल शुरू हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के ₹43.50 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। इसी अवसर पर विश्वविद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत भी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय के जरिए अब उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय खेल शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को देश के अग्रणी खेल राज्यों में शामिल करते हुए ‘खेलभूमि उत्तराखण्ड’ की पहचान मजबूत करना है।
खिलाड़ियों को सम्मान और पुरस्कार
राष्ट्रीय खेल दिवस पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों तथा उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न और लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया।
वर्ष 2025 में शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न, क्याकिंग एंड कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य और बॉक्सिंग के मुकेश चन्द्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार मिला। दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उभरती प्रतिभाओं के लिए छात्रवृत्ति
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खेल छात्रवृत्ति भी प्रदान की। इस योजना के तहत 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को मासिक छात्रवृत्ति दी जाती है, जबकि 14 से 23 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए सहायता का प्रावधान है।
29 खिलाड़ियों को मिल चुकी सरकारी नौकरी
राज्य सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवायोजन की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री के मुताबिक इसके तहत अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को भी विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया जारी है।
23 हाईटेक खेल अकादमियों पर काम
उत्तराखण्ड में खेल सुविधाओं का नेटवर्क मजबूत करने के लिए 23 नई हाईटेक खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में काम चल रहा है। इसके साथ ही ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के जरिए जिलों की विशिष्ट खेल प्रतिभाओं और स्थानीय खेलों को बढ़ावा देने की योजना है।
प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में संचालित हो रहा है। वहीं खेल क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड खेल नीति-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है।
AI से होगी खिलाड़ियों की फिटनेस की निगरानी
खेल प्रशिक्षण में तकनीक के इस्तेमाल पर भी सरकार जोर दे रही है। इसी क्रम में ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है, जिसके जरिए उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी का सपना पैसे, संसाधनों या अवसरों की कमी के कारण अधूरा न रहे। राज्य सरकार वर्ष 2027 के राष्ट्रीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन और ओलंपिक-2036 में उत्तराखण्ड की मजबूत भागीदारी के लिए अभी से रोडमैप पर काम कर रही है।
मेजर ध्यानचंद की जयंती पर शुरू हुई यह पहल उत्तराखण्ड में खेल शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण और प्रतिभा विकास के लिए एक नए संस्थागत ढांचे की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।
