UCC में लिव-इन पंजीकरण पर बड़ा खुलासा: धर्मगुरुओं का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं, जानिए पूरी सच्चाई!

Photo - gaonkelog

 

 

 

TMP : उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण को लेकर कई सवाल उठे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जोड़ों को धर्मगुरुओं से प्रमाणपत्र लेना होगा। इस पर UCC नियमावली कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसा केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगा, जहां रिश्ते पहले से प्रतिषिद्ध श्रेणी (अनुसूची 01) में आते हों।

क्या होंगे लिव-इन पंजीकरण के दस्तावेज़?

निवास प्रमाणपत्र
जन्मतिथि प्रमाणपत्र
आधार कार्ड
किराएदारों के लिए किराएदारी दस्तावेज़
पूर्व तलाक या जीवनसाथी की मृत्यु से जुड़े दस्तावेज़ (यदि लागू हो)

मनु गौड़ ने यह भी स्पष्ट किया कि UCC नियमों का मूल या स्थायी निवास से कोई संबंध नहीं है। उत्तराखंड में कम से कम एक साल से रहने वाला कोई भी व्यक्ति पंजीकरण कर सकता है।

UCC में पंजीकरण आसान, ऑनलाइन प्रक्रिया 10 मिनट में पूरी

UCC पंजीकरण का फॉर्म 16 पेज का जरूर है, लेकिन इसे ऑनलाइन भरने में महज 5-10 मिनट लगेंगे, क्योंकि आधार नंबर डालते ही जरूरी विवरण स्वतः आ जाएगा। ऑफलाइन भरने में भी अधिकतम 30 मिनट का समय लगेगा।

यानी धर्मगुरुओं का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं है, बल्कि पंजीकरण को आसान बनाने के लिए नियम बनाए गए हैं। UCC के तहत हर नागरिक को समान अवसर मिलेगा और यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी।

 

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