SIR और चुनाव आयोग पर भाजपा का पलटवार, संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने चुनाव आयुक्तों के बीच मतभिन्नता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और विपक्ष पर ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का हवाला देकर विपक्ष से सवाल

संबित पात्रा ने पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि SIR के दौरान सबसे अधिक वोट कटने वाली सीटों में 13 पर तृणमूल कांग्रेस, एक पर कांग्रेस और छह पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची से नाम हटने का लाभ भाजपा को मिलता है, तो इन सीटों पर टीएमसी की जीत कैसे हुई।

उन्होंने कहा कि 2014 से 2024 के बीच भाजपा को कई चुनावों में जीत मिली, जबकि कुछ चुनावों में हार का भी सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, इन चुनावों के दौरान ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।

चुनाव आयुक्तों की बैठक पर भी प्रतिक्रिया

भाजपा प्रवक्ता ने चुनाव आयुक्तों के बीच हुए 14 आधिकारिक विचार-विमर्श को स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद बताया। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय होना सामान्य है और विचार-विमर्श के जरिए सहमति बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

संबित पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और सरकार के बीच कथित मिलीभगत के विपक्षी आरोपों के जवाब में कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों का भी जिक्र किया।

नवीन चावला की नियुक्ति का मुद्दा उठाया

संबित पात्रा ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा नवीन चावला की नियुक्ति को लेकर उठाई गई आपत्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि उस समय सोनिया गांधी के पास ऐसा कौन-सा संवैधानिक पद था, जिसके आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कर सकती थीं।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय जनता करती है। पात्रा ने विपक्ष से सवाल किया कि यदि उसे चुनाव आयोग, SIR और EVM पर भरोसा नहीं है, तो वह किस व्यवस्था पर विश्वास करता है।

भाजपा प्रवक्ता ने चुनावी नतीजों और एग्जिट पोल को लेकर EVM पर सवाल उठाने के विपक्षी रुख की भी आलोचना की।

 
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