देहरादून: सचिवालय में गुरुवार को मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने पूंजीगत व्यय, केंद्र सहायतित योजनाओं, वाह्य सहायतित प्रोजेक्ट्स, नाबार्ड, केपीआई और केओआई की गहन समीक्षा की। बैठक में 12 विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी रही। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और कार्यों की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय के लिए कुल ₹14,763 करोड़ का प्रावधान है, जिसमें से ₹2,215 करोड़ (15%) जारी किए गए हैं, और अब तक केवल ₹1,049 करोड़ (7.11%) ही खर्च हो सके हैं। इस पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सितंबर माह तक पूंजीगत बजट का कम से कम 50 प्रतिशत व्यय किया जाना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि 15 अगस्त तक सभी विभाग अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करें ताकि समय पर अनुमोदन हो सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता दी जाए और सभी विभाग केपीआई (Key Performance Indicators) व केओआई (Key Outcome Indicators) पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पर्यटन विभाग खर्च करता है, तो उसका मूल्यांकन इस आधार पर हो कि विदेशी पर्यटकों की संख्या या पर्यटकों के औसत प्रवास अवधि में कितनी वृद्धि हुई।
उद्यान विभाग को कोल्ड चेन और ऑफ-सीजन उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने को कहा गया है। साथ ही पॉलीहाउस प्रोजेक्ट, वैल्यू एडेड और फूड प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स को भी प्राथमिकता में रखा गया है।
कृषि विभाग को बायो फेंसिंग व चेन लिंक फेंसिंग के लिए शीघ्र दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि इसके लिए अलग से एक हेड बनाया जाए और इसमें ₹200 करोड़ का बजट प्रावधान हो। साथ ही, इस योजना को सप्लीमेंट्री बजट में शामिल करने के भी निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष और फसल क्षति अधिक हो रही है।
दुग्ध विकास विभाग को “आंचल” ब्रांड के डेयरी उत्पादों का उत्पादन और वितरण बढ़ाने के निर्देश दिए गए। वहीं गन्ना विकास विभाग को सभी चीनी मिलों की मशीनों की मरम्मत और रखरखाव कार्य शीघ्रता से पूर्ण कर समय पर उत्पादन आरंभ कराने को कहा गया।
