नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने शनिवार को अपना पक्ष सामने रखा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े मूल आदेश और उसके बाद जारी कार्यक्रम तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूर हुए थे।
आयोग की यह सफाई उन रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले कुछ महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया था। रिपोर्ट में फॉर्म-6, मतदाता डेटाबेस, ECINet, पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपील और गोवा के 97 मतदाताओं समेत कई मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
SIR के फैसलों पर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के मुताबिक 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR शुरू करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बाद अलग-अलग चरणों के लिए 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को कार्यक्रम जारी किए गए। आयोग का कहना है कि इन फैसलों को सभी आयुक्तों की मंजूरी मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी आयोग ने उल्लेख किया। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने चुनाव आयोग के पास विशेष गहन पुनरीक्षण कराने की शक्ति को बरकरार रखा था। साथ ही मतदाता सूची से नाम हटाए जाने वाले मामलों में नागरिकता और पात्रता से जुड़े सवालों के निपटारे की प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया था।
फॉर्म-6 को लेकर विवाद पर स्पष्टीकरण
फॉर्म-6 को लेकर उठे सवालों पर आयोग ने कहा कि SIR के दौरान इसके साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के आदेश के अनुरूप है। वहीं, SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
ECINet की स्वतंत्र समीक्षा होगी
ECINet को लेकर आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप रोल-बेस्ड एक्सेस दिया गया है। साथ ही सिस्टम की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। इसमें IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
समिति यह देखेगी कि ECINet कानून और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों के लिए तकनीकी सुविधाओं में बदलाव भी किया जाएगा।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी सामने आया
गोवा में SIR के दौरान 97 ऐसे मतदाताओं का मामला सामने आया, जिन्हें स्थानीय जांच में मतदाता सूची में शामिल किए जाने योग्य पाया गया था, लेकिन अंतिम सूची में नाम नहीं आ सके। आयोग के अनुसार संबंधित BLOs को इन मतदाताओं के घर जाकर फॉर्म लेने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें से 81 लोगों ने अब फॉर्म-6 भर दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समयसीमा
आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान या उसके बाद छूटे लोगों को लगातार मतदाता सूची अपडेट की प्रक्रिया के तहत ERO के पास नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन का अवसर रहेगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल, भाजपा ने आयोग के बयान का समर्थन किया
आयोग की सफाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस बयान पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे ‘डैमेज कंट्रोल’ बताया, जबकि पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आयोग के स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की।
वहीं भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का समर्थन करते हुए कहा कि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
