NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में बड़े बदलाव, बंटवारा, न्यायपालिका और हिटलर से जुड़े अध्याय संशोधित

 

 

 

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई पुस्तक जारी करते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए संस्करण ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में न्यायपालिका, भारत विभाजन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, एडॉल्फ हिटलर और विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े कई अध्यायों में संशोधन किया गया है।

इन बदलावों की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट की वह टिप्पणी है, जिसमें न्यायपालिका से जुड़े पुराने अध्याय के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताते हुए एनसीईआरटी को संबंधित सामग्री हटाने और पुरानी प्रतियां वापस लेने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संशोधित पुस्तक तैयार की गई।

बंटवारे पर कांग्रेस के रुख में बदलाव

नई पुस्तक में भारत विभाजन से जुड़े अध्याय में कांग्रेस की भूमिका को नए तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पहले के संस्करण में कहा गया था कि महात्मा गांधी और अधिकांश कांग्रेस नेताओं ने विभाजन का विरोध किया, लेकिन अंततः उसे आगे बढ़ने का एकमात्र विकल्प मानकर स्वीकार कर लिया।

संशोधित संस्करण में कहा गया है कि कांग्रेस ने विभाजन का कड़ा विरोध किया था और यह सवाल कि उसे स्वीकार करना एकमात्र रास्ता था या नहीं, इतिहासकारों के बीच बहस का विषय है। साथ ही वह टिप्पणी भी हटा दी गई है जिसमें विभाजन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के बीच कांग्रेस नेताओं को “बेबस” बताया गया था।

हिटलर और नाजी विचारधारा का उल्लेख हटाया गया

पुस्तक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित अध्याय में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां उल्लेख था कि उन्होंने एडॉल्फ हिटलर से समर्थन मांगा था और हिटलर को नस्लवादी नाजी विचारधारा वाला तानाशाह बताया गया था, वहीं नए संस्करण में केवल इतना कहा गया है कि नेताजी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए “ब्रिटिश-विरोधी शक्तियों” से सहयोग मांगा था। हिटलर और नाजी विचारधारा का प्रत्यक्ष उल्लेख अब इसमें नहीं है।

सावरकर का उल्लेख जोड़ा गया

संशोधित पुस्तक में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अध्याय में विनायक दामोदर सावरकर का संदर्भ भी जोड़ा गया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1925 में सावरकर ने भी पूर्ण स्वराज की मांग का समर्थन किया था।

न्यायपालिका से जुड़े अध्याय में भी संशोधन

सुप्रीम कोर्ट की आपत्तियों के बाद न्यायपालिका से संबंधित अध्याय में भ्रष्टाचार, अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से जुड़ी सामग्री में भी बदलाव किया गया है। संशोधित पुस्तक अब एनसीईआरटी द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के लिए जारी की गई है।

 
 
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