सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की वैश्विक मुहिम बेअसर! भारत के फैसले के खिलाफ नहीं मिल रहा अंतरराष्ट्रीय समर्थन

PHOTO- JAGRAN

 

 

 

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अभियान चला रहा है। इस्लामाबाद भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाकर वैश्विक सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा जैसे वैश्विक विषयों से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहता है। हालांकि, भारत की स्थिति को लेकर वैश्विक समुदाय में कोई व्यापक विरोध देखने को नहीं मिला है।

जानकारों के अनुसार पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि भारत सिंधु बेसिन का पानी रोक रहा है। इतिहास पर नजर डालें तो 1950 के दशक से ही पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि के तहत मिले जल उपयोग संबंधी अधिकारों को संप्रभु अधिकार के रूप में प्रस्तुत कर दुनिया को भ्रमित करने की कोशिश करता है।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल उपयोग को लेकर किया गया एक द्विपक्षीय समझौता है। इसके तहत दोनों देशों के अधिकार और दायित्व तय किए गए हैं। यह संधि नदियों पर किसी देश के स्वामित्व का नहीं, बल्कि जल के उपयोग और प्रबंधन का ढांचा निर्धारित करती है। भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता उसके भूभाग में बहने वाली नदियों पर बनी रहती है।

भारत का स्पष्ट संदेश

विश्लेषकों का कहना है कि संधि को निलंबित करने का भारत का निर्णय केवल जल प्रवाह से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक कड़ा कूटनीतिक संदेश भी है। उनका मानना है कि किसी भी द्विपक्षीय समझौते के प्रभावी संचालन के लिए दोनों पक्षों का सहयोग आवश्यक होता है और भारत ने अपने फैसले के जरिए यही संकेत दिया है कि लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों में पुराने ढांचे की समीक्षा की जा सकती है।

 
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