TMP : भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए ISRO के SpaDeX (Space Docking Experiment) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। सोमवार रात 10 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुए PSLV रॉकेट ने दो छोटे उपग्रहों को 470 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर डॉकिंग और अनडॉकिंग का पहला परीक्षण किया।
क्या है SpaDeX मिशन?
इस मिशन के तहत दो उपग्रहों, स्पेसक्राफ्ट ए और स्पेसक्राफ्ट बी, को अंतरिक्ष में एक-दूसरे से जोड़ा और अलग किया जाएगा। यह तकनीक न केवल भारत के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों—जैसे चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 में चांद पर भारतीय यात्री भेजने के मिशन—के लिए अहम है, बल्कि इसे अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
डॉकिंग और अनडॉकिंग: अंतरिक्ष की पेचीदा कला
SpaDeX मिशन में दो उपग्रहों को पांच किलोमीटर की दूरी पर लॉन्च किया गया, जिन्हें क्रमशः “टारगेट” और “चेजर” नाम दिया गया। 28,800 किमी/घंटा की रफ्तार से ये उपग्रह धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब लाए गए। जब इनकी दूरी तीन मीटर हुई, तो डॉकिंग प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें दोनों उपग्रह एक-दूसरे से जुड़े। इस प्रक्रिया को पूरी तरह इसरो के वैज्ञानिकों ने धरती से नियंत्रित किया।
भारत के लिए ऐतिहासिक पल
इस तकनीक को अब तक केवल रूस, अमेरिका और चीन ही अंजाम दे पाए हैं। ISRO ने अपने अनूठे डॉकिंग मैकेनिज्म का पेटेंट भी ले लिया है, जो भविष्य में भारत को अंतरिक्ष में अग्रणी बनाएगा।
भविष्य की योजनाओं के लिए आधारशिला
- चंद्रयान-4: चांद से सैंपल लाने के लिए इस तकनीक का उपयोग होगा।
- भारतीय स्पेस स्टेशन: मॉड्यूल्स को जोड़ने में यह तकनीक अहम होगी।
- चांद पर भारतीय मिशन (2040): भारतीय यात्री को चांद पर भेजने और वापस लाने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी होगी।
अंतरराष्ट्रीय इतिहास में भारत की नई उपस्थिति
डॉकिंग तकनीक पर पहली बार 1966 में अमेरिका ने सफलता पाई थी। अब, SpaDeX मिशन के जरिए भारत इस तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल कर अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी नई पहचान बना रहा है।