- “मंगलौर में बदलाव” वाली फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
- प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भेजा नोटिस
- रावत की सियासी सक्रियता से पार्टी में असमंजस
नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बढ़ती सियासी सक्रियता ने पार्टी हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन पर पार्टी लाइन से अलग हटकर समानांतर कार्यक्रम करने का आरोप है। वहीं प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी नोटिस के रूप में एक चिट्ठी भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है।
कहानी की शुरुआत 20 सितंबर को हुई, जब हरीश रावत हरिद्वार के मंगलौर में एक स्वागत कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने फेसबुक पर “मंगलौर में बदलाव” जैसी द्विअर्थी टिप्पणी लिखी, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। पार्टी के एक वर्ग ने इसे प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ संकेत के रूप में देखा। तब से रावत लगातार विभिन्न जिलों में स्वागत और जनसंपर्क कार्यक्रम कर रहे हैं, जिनमें स्थानीय नेताओं की भारी भीड़ जुट रही है, लेकिन पार्टी संगठन से इनकी कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हाईकमान इसे अनुशासनहीनता मान रहा है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी एकजुटता दिखाना चाहती है, ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता का अलग धड़ा बनाकर चलना नुकसानदायक हो सकता है। वेणुगोपाल ने रावत से स्पष्ट कहा है कि सभी कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के समन्वय से ही हों।
दूसरी ओर, रावत समर्थकों का तर्क है कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए जनता के बीच जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि हरीश रावत हाईकमान की इस नाराजगी को कितनी तवज्जो देते हैं और क्या वे अपनी कार्यशैली में बदलाव लाते हैं।

