बंगाल में दिलीप घोष की दमदार वापसी: संघर्ष, विवाद और फिर सत्ता तक का सफर

 

 

 

TMP: दिलीप घोष की राजनीति में एक बार फिर जोरदार वापसी हुई है। West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित कर दिया कि बंगाल भाजपा की राजनीति में उनका प्रभाव अब भी कायम है। मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari के साथ शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों में घोष का नाम सबसे चर्चित रहा।

भाजपा को बंगाल में खड़ा करने वाले नेताओं में सबसे आगे

बंगाल की राजनीति में भाजपा को एक छोटी पार्टी से तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी ताकत बनाने में दिलीप घोष की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। अपने बेबाक अंदाज और जमीनी राजनीति के लिए पहचान रखने वाले घोष ने 2015 से 2021 के बीच पार्टी संगठन को गांव-गांव तक मजबूत किया।

उनकी अगुवाई में भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। खुद दिलीप घोष मेदिनीपुर से सांसद चुने गए और जंगलमहल क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा।

पार्टी के भीतर बढ़े मतभेद

हालांकि, समय के साथ बंगाल भाजपा के भीतर राजनीतिक समीकरण बदलने लगे। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद घोष और प्रदेश नेतृत्व के कुछ नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से संगठनात्मक फैसलों और चुनावी रणनीति की आलोचना की थी।

मेदिनीपुर से हटाकर बर्धमान-दुर्गापुर सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला भी उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद घोष ने पार्टी के भीतर गुटबाजी और कमजोर चुनाव प्रबंधन को हार की बड़ी वजह बताया था।

ममता से मुलाकात पर भी हुआ विवाद

राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब दिलीप घोष अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ दीघा में आयोजित जगन्नाथ मंदिर उद्घाटन समारोह में पहुंचे और वहां उनकी मुलाकात Mamata Banerjee से हुई। इस शिष्टाचार मुलाकात को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं ने नाराजगी जाहिर की और राज्य इकाई ने इससे दूरी बना ली।

संगठन ने फिर जताया भरोसा

इन तमाम विवादों के बावजूद दिलीप घोष ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा। विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के दौरान पार्टी ने एक बार फिर उनके सांगठनिक अनुभव और जमीनी कार्यकर्ताओं से गहरे जुड़ाव पर भरोसा जताया।

घोष ने खड़गपुर सदर सीट से चुनाव लड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि यह वही सीट है, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के विधायक प्रदीप सरकार को हराकर अपनी मजबूत वापसी का संदेश दिया।

दूसरी पारी में बड़ी जिम्मेदारी

मंत्री पद की शपथ के साथ अब दिलीप घोष की राजनीति की दूसरी पारी शुरू हो गई है। भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव और संगठन पर पकड़ नई सरकार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगी।

 
 
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