रुद्रपुर: सरदार भगत सिंह महाविद्यालय, रुद्रपुर में छात्रों के भविष्य से बड़ा खिलवाड़ सामने आया है। महाविद्यालय में डिप्लोमा इन इको-टूरिज्म नामक कोर्स के नाम पर नौ वर्षों से विद्यार्थियों से फीस वसूली गई, लेकिन आज तक परीक्षा नहीं कराई गई। इससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
कोर्स की शुरुआत और फीस वसूली
करीब नौ वर्ष पहले महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस योजना के तहत “डिप्लोमा इन इको-टूरिज्म” कोर्स शुरू किया गया था। इस एक वर्षीय कोर्स में 25 सीटें निर्धारित थीं। अब तक सवा सौ से अधिक विद्यार्थियों ने इसमें प्रवेश लिया और प्रत्येक से चार हजार रुपये के हिसाब से शुल्क लिया गया।
शुरुआत में एक शिक्षक के माध्यम से कक्षाएं संचालित हुईं और पहले बैच की परीक्षा कराई गई। लेकिन इसके बाद लगातार आठ वर्षों से न तो कक्षाएं चलीं और न ही परीक्षाएं आयोजित की गईं।
विद्यार्थियों को न परीक्षा, न प्रमाणपत्र, न पैसा
2017-18 से हर वर्ष औसतन 20 से 25 विद्यार्थी इस कोर्स में दाखिल होते रहे। वर्तमान में 120 से अधिक छात्र ऐसे हैं जिनकी परीक्षा अब तक नहीं हुई। पिछले वर्ष भी 19 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, लेकिन उन्हें न परीक्षा की तारीख बताई गई और न ही कोर्स का कोई परिणाम मिला।
छात्र कई बार कॉलेज प्रशासन से जानकारी मांगते रहे, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, जिन छात्रों की पढ़ाई अधूरी रह गई, उन्हें अब तक फीस भी वापस नहीं की गई।
जांच हुई, लेकिन केवल एक छात्र को राहत
मामले में एक छात्र की शिकायत पर निदेशालय स्तर से जांच कराई गई थी। हालांकि जांच कमेटी ने केवल उसी छात्र के प्रकरण का निस्तारण किया। बाकी विद्यार्थियों की समस्याएं अब भी जस की तस हैं।
जांच कमेटी ने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए थे कि विश्वविद्यालय से कोर्स की स्वीकृति और वैधता से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जिम्मेदारों का पक्ष
डा. विश्वनाथ खलीक, निदेशक उच्च शिक्षा ने कहा,
“मामले में सोमवार को विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी, इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी।”
प्रो. ए.एन. सिंह, प्राचार्य, एसबीएस पीजी कॉलेज रुद्रपुर ने बताया,
“मुझे एक माह पहले ही चार्ज मिला है। वर्तमान में अवकाश चल रहा है। कॉलेज खुलने पर पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी।”
राजेश कुमार, प्रभारी, डिप्लोमा इन इको-टूरिज्म कोर्स ने कहा,
“मुझे एक वर्ष पहले चार्ज मिला है। इस दौरान न कक्षाएं चली हैं, न ही कोई परीक्षा हुई है। पहले के विद्यार्थियों की परीक्षाएं भी नहीं कराई गईं।”
छात्रों में रोष, कार्रवाई की मांग
लंबे समय से परीक्षा न होने और फीस वापसी न मिलने से विद्यार्थी नाराज़ हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनका करियर बर्बाद हो रहा है। छात्र अब उच्च शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
