देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) अधिनियम को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक परिवर्तन करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल मनरेगा का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की मूल संरचना में व्यापक सुधार है, जिससे गांवों की आर्थिक और सामाजिक नींव मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को स्थायी रोजगार, महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और गांवों को विकास की नई दिशा देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि विकसित गांव ही विकसित भारत की आधारशिला हैं और VB-G RAM G इसी सोच को साकार करता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अधिनियम के तहत अब ग्रामीण परिवारों को 100 के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार का कानूनी अधिकार मिलेगा, जो पहले की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। यदि 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की गई है। भुगतान व्यवस्था को भी सुदृढ़ करते हुए साप्ताहिक भुगतान और देरी की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि VB-G RAM G को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग, मोबाइल ऐप और सार्वजनिक डैशबोर्ड, AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन तथा वर्ष में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं इस योजना को नई पीढ़ी की रोजगार गारंटी योजना बनाती हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम में किसान हितों की विशेष सुरक्षा की गई है। बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिनों तक योजना के कार्य कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे, जिससे किसानों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े और खेती की लागत संतुलित बनी रहे।
उन्होंने कहा कि VB-G RAM G के माध्यम से ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को वास्तविक निर्णयकारी शक्ति दी गई है। विकास कार्य ऊपर से थोपे नहीं जाएंगे, बल्कि ग्राम सभा द्वारा चिन्हित किए जाएंगे। कम से कम 50 प्रतिशत कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे और जॉब कार्ड, पंजीकरण तथा योजना निर्माण जैसे निर्णय स्थानीय स्तर पर लिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत कार्यों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया गया है। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियां और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। तालाब, चेकडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, SHG शेड, स्किल सेंटर, ग्रामीण हाट, रिटेनिंग वॉल और ड्रेनेज जैसे कार्यों से रोजगार के साथ-साथ गांवों का स्थायी विकास सुनिश्चित होगा।
महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए स्किल सेंटर, शेड और ग्रामीण हाट जैसी संरचनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे महिलाओं को गांव में ही सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए ग्राम रोजगार सहायक, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रशिक्षण, मानदेय और निगरानी के लिए प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, जिससे कार्य गुणवत्ता, समयबद्ध भुगतान और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित होगी।
वित्तीय प्रबंधन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि VB-G RAM G के तहत सामान्य राज्यों के लिए 60:40 और हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात तय किया गया है। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य को केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जिससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य होने के कारण VB-G RAM G उत्तराखंड में जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण अवसंरचना के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा। यह अधिनियम गांवों को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने बताया कि SBI के विश्लेषण के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को लगभग ₹17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना गरीब-विरोधी नहीं, बल्कि गरीबी के मूल कारणों पर सीधा प्रहार है, जिसमें श्रमिकों को अधिक काम, समय पर वेतन और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
