मसूरी निकाय चुनाव में बवाल: आचार संहिता तोड़ने पर ‘कीन’ संस्था के खिलाफ सख्ती, अनुबंध रद्द होने की चेतावनी

 

– चुनावी घमासान के बीच आचार संहिता उल्लंघन पर ‘कीन’ को नोटिस

मसूरी: उत्तराखंड में निकाय चुनावों का बिगुल बजते ही आचार संहिता के उल्लंघन पर प्रशासन की सख्ती देखने को मिल रही है। मसूरी नगर पालिका में कूड़ा निस्तारण का काम देखने वाली ‘कीन’ संस्था चुनावी विवादों के केंद्र में आ गई है। आरोप है कि संस्था के कर्मचारियों ने एक व्यक्ति विशेष के पक्ष में प्रचार किया, जो आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है।

फेसबुक पोस्ट बना ‘कीन’ के लिए मुसीबत
मामला तब गर्माया जब ‘कीन’ संस्था के कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति विशेष के लिए प्रचार किया गया। इस पर मसूरी नगर पालिका प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संस्था के प्रबंधक को नोटिस थमा दिया। अधिशासी अधिकारी तनवीर सिंह ने इसे गंभीर बताते हुए संस्था से तुरंत स्पष्टीकरण मांगा है।

अनुबंध पर खतरा, चेतावनी जारी
नगर पालिका प्रशासन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि ‘कीन’ संस्था नगर पालिका के साथ डोर-टू-डोर कूड़ा निस्तारण के लिए अनुबंधित है। लेकिन आचार संहिता के तहत किसी भी सरकारी या अनुबंधित संस्था को चुनाव प्रचार में भाग लेने की इजाजत नहीं है। अगर आरोप सही पाए गए, तो ‘कीन’ का अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

एसडीएम और रिटर्निंग ऑफिसर को सौंपी रिपोर्ट
मसूरी के अधिशासी अधिकारी ने इस मामले की जानकारी एसडीएम और रिटर्निंग ऑफिसर को भी दे दी है। उन्होंने संस्था को निर्देश दिया है कि तुरंत प्रचार गतिविधियां बंद की जाएं और मामले का स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।

छोटी सरकार की बड़ी जंग, दांव पर कई साख
23 जनवरी को उत्तराखंड में निकाय चुनावों के लिए मतदान होना है, जबकि 25 जनवरी को मतगणना की जाएगी। यह चुनाव प्रदेश में “छोटी सरकार” के गठन के लिए हो रहे हैं, लेकिन इसमें बड़े-बड़े दिग्गजों की साख दांव पर लगी है। हर राजनीतिक दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

चुनावी गर्मी के बीच कार्रवाई से बढ़ी हलचल
इस घटना ने मसूरी में चुनावी सरगर्मी को और तेज कर दिया है। जहां प्रशासन आचार संहिता के उल्लंघन पर पैनी नजर बनाए हुए है, वहीं राजनीतिक पार्टियां इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने में जुट गई हैं।

जनता की नजरें फैसले पर
मसूरी की जनता अब यह देख रही है कि इस विवाद का क्या नतीजा निकलता है। क्या ‘कीन’ संस्था पर अनुबंध रद्द होने की गाज गिरती है, या मामला समझौते तक सुलझता है? निकाय चुनावों की इस दिलचस्प लड़ाई में हर कदम पर सियासी हलचल तेज हो रही है।

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