धराली में बादल फटा, कल्प केदार मंदिर बर्बाद – महाभारतकालीन आस्था का प्रतीक बहा, जनजीवन तबाह

 

 

TMP: उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में सोमवार रात आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। बादल फटने से आई बाढ़ ने गांव का बाजार पूरी तरह बहा दिया, कई घर और होटल मलबे में समा गए। महाभारतकाल से जुड़ा ‘कल्प केदार मंदिर’ भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुंचा है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, खीरगाड़ क्षेत्र में बाढ़ से अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मौके पर सेना, SDRF, NDRF और जिला प्रशासन की टीमें तैनात हैं।

कल्प केदार: वह शिवधाम जो अब इतिहास हो गया

धराली स्थित कल्प केदार मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक दुर्लभ धरोहर भी था। माना जाता है कि यह मंदिर केदारनाथ से भी प्राचीन था और महाभारत काल में निर्मित हुआ था। कत्यूर शिखर शैली में बने इस मंदिर का गर्भगृह प्रवेशद्वार से सात-आठ मीटर नीचे था, जहां शिवजी की मूर्ति स्थापित थी।

चारधाम यात्रा पर गंगोत्री जाने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करना नहीं भूलते थे। धराली गांव गंगोत्री मार्ग पर एक प्रमुख पड़ाव होता है, जहां श्रद्धालु कुछ समय रुक कर विश्राम करते थे।

धराली: हरे जंगलों, बर्फीली चोटियों और अब सिसकते मकानों का गांव

धराली का नाम सुनते ही एक शांत, सुंदर और हरे-भरे पहाड़ों से घिरा गांव आँखों के सामने आता है। बर्फ से ढकी चोटियाँ, देवदार के पेड़ और बहती भागीरथी — सबने इस गांव को एक स्वर्गिक विश्राम स्थल बना दिया था। लेकिन आज यह गांव ध्वस्त मकानों, बहे मंदिरों और मलबे में तलाशते अपनों की चीखों से गूंज रहा है।

प्रशासन सतर्क, लेकिन चुनौती बड़ी

स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत और बचाव टीमें मौके पर भेज दी हैं। उत्तरकाशी जिला प्रशासन, सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हैं। हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स भी लगाए जा सकते हैं।

सरकार से मांग: कल्प केदार मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल हो

स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की सरकार से अपील है कि कल्प केदार मंदिर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए तत्काल योजना बनाई जाए। साथ ही धराली गांव को सुरक्षित और पुनर्स्थापित किया जाए।

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