देहरादून: उत्तराखंड में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर फर्जी मदरसा बनाकर सरकारी पैसे की बंदरबांट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरस्वती शिशु मंदिर जैसे विद्यालय को मदरसे के रूप में दर्शाकर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति लेने की साजिश का खुलासा हुआ है। मामले के संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाते हुए गहन जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते को इस पूरे मामले की तह तक जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआती जांच में उधमसिंह नगर जिले के 6 संस्थानों से जुड़े 456 आवेदकों की जानकारी संदिग्ध पाई गई है। हैरानी की बात यह है कि इनमें सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल, किच्छा का नाम भी शामिल है, जो न तो मदरसा है और न ही अल्पसंख्यक संस्थान।
बावजूद इसके, इस विद्यालय को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर अल्पसंख्यक संस्था बताकर 154 मुस्लिम छात्रों के नाम से छात्रवृत्ति के लिए दर्ज किया गया है। इस फर्जीवाड़े में मोहम्मद शारिक-अतीक नामक व्यक्ति को स्कूल का संचालक बताया गया है।
इसी तरह, काशीपुर की ‘नेशनल अकादमी JMYIH-S’, मदरसा अल जामिया उल मदरिया, मदरसा अल्बिया रफीक उल उलूम, और मदरसा जामिया रजा उल उलूम से जुड़े सैकड़ों छात्रों और उनके संचालकों के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम धामी ने स्पष्ट किया:
“देवभूमि में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरस्वती शिशु मंदिर के नाम पर मदरसा दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पने की साजिश को गंभीरता से लिया गया है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
विशेष सचिव धकाते ने बताया कि राज्यभर में इस तरह की प्रविष्टियों की व्यापक जांच की जा रही है और केंद्र सरकार से भी इस संबंध में समन्वय स्थापित किया गया है। साथ ही दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु:
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सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल को फर्जी मदरसा दिखाकर छात्रवृत्ति ली गई
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2021-22 और 2022-23 में 456 आवेदकों की जानकारी संदिग्ध
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पूरे राज्य में छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच शुरू
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सीएम धामी ने दिए दोषियों पर कठोर कार्रवाई के संकेत
यह मामला न सिर्फ छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की सख्ती का प्रमाण भी है।
