पीटीआई: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत अब सिर्फ स्थापित मध्यस्थता केंद्रों की बराबरी करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि यह पुनर्कल्पना कर रहा है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में मध्यस्थता कैसी होनी चाहिए। स्वीडन के गोथेनबर्ग में ‘भारत का वैश्विक मध्यस्थता स्थल के रूप में उदय’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मध्यस्थता का भविष्य अब केवल अंतरराष्ट्रीय नहीं, बल्कि भारतीय भी है।
विवाद समाधान का पसंदीदा तरीका बन रही मध्यस्थता
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता को अब वैकल्पिक तंत्र नहीं माना जा रहा, बल्कि यह विवादों के समाधान का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि लक्षित सुधारों, न्यायिक पुनर्संतुलन और संस्थागत विकास के साथ भारत एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है जो न सिर्फ वैश्विक मानकों के अनुरूप है बल्कि देश की कानूनी और आर्थिक जरूरतों को भी दर्शाता है।
वैश्विक हब बनने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
उन्होंने कहा कि भारत को मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए सिर्फ कानून और ढांचा पर्याप्त नहीं, बल्कि सरकार, मध्यस्थता संस्थानों, पेशेवरों और शिक्षाविदों को मिलकर भरोसे का वातावरण बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि हम निरंतर नवाचार और विचारशील सहभागिता के साथ आगे बढ़ें, तो भारत न केवल मध्यस्थता का सक्षम स्थल बनेगा, बल्कि इसके भविष्य को आकार देने में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।
