TMP : उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू हो रही है, और इसे सुचारू व सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन विभाग खासकर केदारनाथ यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने में तेजी से कार्य कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
केदारनाथ मार्ग पर बड़े सुधार
पिछले वर्ष जुलाई में भारी बारिश से केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। हालाँकि, आपातकालीन मरम्मत के बाद इसे फिर से चालू कर दिया गया था, लेकिन स्थायी सुधार कार्य अभी भी लंबित थे। PWD सचिव पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, अब बर्फ हटने के बाद मार्ग के कुछ हिस्सों में रेलिंग निर्माण और चौड़ीकरण कार्य किया जाएगा।
इसके अलावा, रामबाड़ा से गरुड़ चट्टी के लिए एक वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना थी, जिसे वन विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। इस मार्ग को वन-वे के रूप में उपयोग किया जाएगा ताकि यात्रियों की आवाजाही सुगम हो सके।
सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर विशेष ध्यान
चारधाम यात्रा के दौरान भूस्खलन (लैंडस्लाइड) वाले क्षेत्रों में खास ध्यान दिया जा रहा है। चमोली जिले में NHIDCL द्वारा नया स्लाइड ज़ोन ठीक करने का कार्य जारी है, ताकि इस बार यात्रियों को परेशानी न हो। उत्तरकाशी से गंगोत्री जाने वाले मार्ग को भी BRO के तहत नया रूप दिया जा रहा है।
PWD सचिव ने बताया कि रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में यात्रा मार्गों का निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि रिस्पांस टाइम को कम करने और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई गई है।
श्रद्धालुओं के लिए राहत
- मार्ग बाधित होने की स्थिति में यात्रियों को पहले ही रोका जाएगा।
- आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सड़क मरम्मत की योजना तैयार है।
- सभी संवेदनशील स्थानों पर राहत दलों और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।