POOJA BARTHWAL: नेपाल इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल की चपेट में है। देश वर्षों में अपनी सबसे विकट राजनीतिक अशांति का सामना कर रहा है। इस बार यह संघर्ष छात्र बनाम सरकार की लड़ाई से कहीं आगे बढ़ चुका है। देश के कोने-कोने से उठते विरोध के स्वर, अब हिंसा की भयावहता तक पहुँच चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हैं।
इस प्रदर्शनों का कारण बेहद जटिल है। कहीं सरकार का सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय इसे ट्रिगर मान लिया गया, तो कहीं देश में फैले भ्रष्टाचार और जन असंतोष को वजह बताया जा रहा है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों की नाराजगी में अब ‘हिंदू राष्ट्र’ का पक्ष भी आ गया है। विरोधकारी नारे “सरकार में बैठे हत्यारों को सजा दो”, “बच्चों की हत्या बंद करो” के साथ-साथ, नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की भी मांग कर रहे हैं।
पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह, जो राजशाही के पतन के बाद राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे, ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में इस हिंसा की निंदा करते हुए प्रदर्शनकारियों की जायज़ मांगों को मान्यता दी और बाहरी तत्वों द्वारा अशांति का लाभ उठाए जाने की चेतावनी भी दी। ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थकों का मानना है कि वे परंपरा और स्थिरता के प्रतीक हैं। मार्च में काठमांडू में हुए राजभक्तों के बड़े आंदोलन ने भी यह साफ कर दिया कि एक बड़ा वर्ग नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है। उस रैली में लगभग 10,000 समर्थकों ने हवाई अड्डा अवरुद्ध कर दिया था, बिना किसी हिंसा के, बस एक सशक्त संदेश देने के लिए।
हालांकि प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद ओली का इस्तीफा हो चुका है, लेकिन प्रदर्शन अब भी थम नहीं रहा। बढ़ती हिंसा, अस्थिरता और अनिश्चितकालीन कर्फ्यू के बावजूद, राजधानी काठमांडू सहित देश के कई शहरों में लगातार नारे लग रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या नेपाल में हिंदू राष्ट्र का पुनरुत्थान देश की समस्याओं का समाधान बन सकता है? क्या यह वास्तव में सामाजिक और राजनीतिक गतिरोध को दूर करेगा?
समय के साथ-साथ यह ही साफ होगा कि ‘हिंदू राष्ट्र’ फैक्टर इस विद्रोह में कितनी भूमिका निभा रहा है। पर फिलहाल इतना तय है कि नेपाल का यह संघर्ष अब केवल राजनीतिक या आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक सांस्कृतिक-धार्मिक पुनरुत्थान की आकांक्षा का स्वरूप भी ले चुका है।
