देहरादून: उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा कानूनी गतिरोध अब समाप्त हो गया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने अहम फैसले में पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर पूर्व में लगाए गए स्थगन आदेश (स्टे) को हटा दिया, जिससे राज्य में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है।
क्या था मामला?
राज्य सरकार द्वारा जारी आरक्षण सूची और परिसीमन को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी है। इस पर हाईकोर्ट ने कुछ सप्ताह पहले चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट का फैसला
शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को उचित मानते हुए स्थगन आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा “स्थानीय निकाय चुनावों में अनावश्यक देरी लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग अब:
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पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी करेगा
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ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत चुनावों की तारीखें घोषित करेगा
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मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित करेगा
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नामांकन व मतदान की प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से शुरू करेगा
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
राज्य सरकार और प्रमुख राजनीतिक दलों ने हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत किया है।
अब तक जारी असमंजस की स्थिति खत्म होने से राजनीतिक सरगर्मी भी तेज़ हो गई है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नई ऊर्जा मिली है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के जरिए ग्राम स्तर पर शासन और विकास को मजबूती मिलेगी।
