टूट चुके रिश्ते को सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतिम मंजूरी, अनुच्छेद 142 के तहत तलाक मंजूर

 

 

TMP : सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह बिखर चुके वैवाहिक संबंध को खत्म करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142(1) के तहत तलाक की मंजूरी दी। शीर्ष अदालत ने न केवल पति की तलाक की अर्जी स्वीकार की, बल्कि पति को 25 लाख रुपये की स्थायी भरण-पोषण राशि पत्नी को देने का आदेश दिया

आपसी विवादों पर पूर्ण विराम, दर्ज केस किए गए खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच दर्ज सभी आपराधिक और दीवानी मुकदमों को रद्द कर दिया। साथ ही, अदालत ने बिना सुनवाई पासपोर्ट जब्त करने और अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण की कार्यवाही को भी गलत करार दिया। संबंधित अथॉरिटी को एक हफ्ते के भीतर पति का पासपोर्ट लौटाने के आदेश दिए गए

मामले का कानूनी पक्ष: अनुच्छेद 142 के तहत मिला न्याय

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। पति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल के हावड़ा न्यायिक मजिस्ट्रेट और कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पासपोर्ट जब्त करने और प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू करने के आदेश को चुनौती दी थी

सिर्फ 80 दिन चली शादी, 5 साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी

कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी शादी के बाद केवल 80 दिन साथ रहे और पिछले 5 वर्षों से अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। शादी से कोई संतान नहीं होने के कारण तलाक का असर किसी तीसरे पक्ष पर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब रिश्ते में सुलह की कोई संभावना नहीं बची हो, तो शादी को जबरदस्ती बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट की मिसाल, टूटे रिश्तों के लिए अनुच्छेद 142 बना समाधान

शिल्पा शैलेष केस में संविधान पीठ ने व्यवस्था दी थी कि अगर शादी पूरी तरह खत्म हो चुकी हो, तो अनुच्छेद 142(1) के तहत अदालत विवाह विच्छेद का आदेश दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर यह फैसला सुनाया और इसे पूर्ण न्याय की दिशा में एक अहम मिसाल करार दिया

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