चाँद के साऊथ पोल पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला, भारत होगा विश्व का पहला देश
चंद्रयान – 3 की सफलता में अब महज कुछ घंटे का समय बचा हैं | आज पूरा देश उस क्षण का इंतजार कर रहा है जब भारत का चंद्रयान ३ चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा | ये वो ऐतिहासिक क्षण होगा जब भारत का चंद्रयान -3 चाँद के साऊथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला विश्व का पहला देश बन जायेगा | आज हर कोई अपने अपने तरीके से चंद्रयान -3 की सफलता के लिए दुवाएँ कर रहा है |
चार साल पहले फेल हुआ था मिशन
आपको बता दें कि भारत का चंद्रयान 2 चार साल पहले विफल हो गया था | लेकिन भारत ने चंद्रयान 2 की विफलता के बाद हार नहीं मानी और ठीक चार साल बाद चंद्रयान 3 आज चांद की सतह पर शाम 6 बजकर 4 मिनट पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग करेगा । इस गौरव के क्षण में हर भारतवासी की निगाहें टीवी पर हैं क्योंकि आज भारत के इतिहास में सफलता का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इस मिशन को सफल बनाने में इसरो के वैज्ञानिकों के अलावा हमारे देश की मिट्टी का भी सुनहरा हाथ है। जी हां, यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ये सच है। आज भले ही चंद्रयान-3 मिशन को लेकर दुनिया में इसरो की तारीफ हो रही है|
आपको बता दें कि ISRO वर्ष 2012 से ही चंद्रयान मिशन की क्षमताओं की जांच-परख के लिए नामक्कल में मौजूद मिट्टी का इस्तेमाल कर रहा है। दरअसल इस जिले की जमीन काफी हद तक चंद्रमा की सतह से मिलती-जुलती है। इसलिए इसरो के वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 400 किलोमीटर दूर मौजूद नामक्कल जिले की मिट्टी की भी जाँच करते रहे ।
चांद पर मौजूद है ‘एनॉर्थोसाइट’ मिट्टी (PTI)
सवाल यह है कि आखिर इस मिट्टी की क्या खासियत है, जिसे ISRO के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 मिशन के लिए इस्तेमाल किया है? तो इसका जवाब पेरियार विश्वविधालय के भूविज्ञान विभाग के निदेशक प्रोफेसर एस अनबझगन ने दिया है। समाचार एजेंसी PTI से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा,यहां की मिट्टी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद मिट्टी के अनुरूप है। चांद की सतह पर ‘एनॉर्थोसाइट’ मिट्टी मौजूद है। मिट्टी का यह प्रकार इस इलाके में पाई जाती है।
नामक्कल में मौजूद मिट्टी चंद्रमा की सतह के समान
उन्होंने बताया कि इसरो को कम से कम 50 टन मिट्टी भेजी गई, जो चंद्रमा की सतह से मिलती-जुलती है। इसरो के वैज्ञानिकों ने भी इस बात को माना है कि नामक्कल में मौजूद मिट्टी चंद्रमा की सतह के समान है। उन्होंने आगे बताया कि नामक्कल के पास मौजूद सीतमपुंडी और कुन्नामलाई गांव में भी कुछ उसी प्रकार की मिट्टी है,जिसे इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान मिशन की परीक्षण के लिए इस्तेमाल करते हैं।
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