LAC तक पहुंच आसान बनाने में जुटा भारत, अरुणाचल में सड़क नेटवर्क 14 हजार KM के पार

 

 

 

  • 10 साल में सालाना सड़क निर्माण 300 से बढ़कर 1,800 किलोमीटर पहुंचने का दावा
  • BRO के 64 सड़क प्रोजेक्ट और फ्रंटियर हाईवे पर भी नजर

नई दिल्ली : भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अरुणाचल प्रदेश में सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय विकास के लिहाज से भी अहम हो गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच मजबूत करने के लिए सड़क, सुरंग, पुल और हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विधानसभा में राज्य के सड़क नेटवर्क में पिछले दशक के दौरान बड़े विस्तार की जानकारी दी थी। 

खांडू के मुताबिक, राज्य में सालाना सड़क निर्माण की रफ्तार करीब 300 किलोमीटर से बढ़कर 1,800 किलोमीटर हो गई है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क 4,131 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 14,000 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1,043 किलोमीटर से बढ़कर 2,538 किलोमीटर तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, 4,060 किलोमीटर का अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विभिन्न चरणों में है।

सीमा पर सड़कें क्यों हैं अहम?

अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और दुर्गम है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार तक पहुंच मिलती है। रणनीतिक दृष्टि से भी सड़कें सैनिकों, उपकरणों और जरूरी आपूर्ति को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाने में मदद करती हैं।

रक्षा मंत्रालय के दिसंबर 2022 में संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, उससे पहले के पांच वर्षों में सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश में 64 सड़कों पर कुल 3,097.15 किलोमीटर का काम किया था। यह आंकड़ा उस अवधि का है, इसे मौजूदा कुल सड़क नेटवर्क या आज तक के निर्माण का आंकड़ा नहीं समझना चाहिए। 

सेला और नेचिपु सुरंग से आवाजाही को मदद

अरुणाचल में सीमा तक संपर्क बेहतर करने वाली परियोजनाओं में सेला और नेचिपु सुरंग शामिल हैं। इनका उद्देश्य कठिन पहाड़ी भूभाग और मौसम के कारण सड़क आवाजाही में आने वाली बाधाओं को कम करना है।

सेला सुरंग तवांग क्षेत्र तक हर मौसम में संपर्क बेहतर करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। वहीं, नेचिपु सुरंग बालीपारा-चारदुआर-तवांग मार्ग पर आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बनाई गई है। इन परियोजनाओं का महत्व केवल सामरिक पहुंच तक सीमित नहीं है; इनसे स्थानीय लोगों और पर्यटकों की यात्रा भी अधिक सुगम हो सकती है।

BRO की अलग-अलग परियोजनाएं संभाल रहीं निर्माण कार्य

अरुणाचल प्रदेश में BRO की विभिन्न परियोजनाएं अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास तथा रखरखाव का काम करती हैं। इनमें प्रोजेक्ट वर्तक, प्रोजेक्ट अरुणांक, प्रोजेक्ट ब्रह्मांक और प्रोजेक्ट उदयक शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का काम दुर्गम इलाकों को जोड़ने, मौजूदा मार्गों को बेहतर बनाने और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच के लिए जरूरी ढांचा तैयार करने से जुड़ा है। हालांकि, किसी परियोजना के तहत कुल सड़क नेटवर्क, निर्माणाधीन हिस्सों और हाल में पूरी हुई सड़कों के आंकड़े अलग-अलग हो सकते हैं।

फ्रंटियर हाईवे पर भी नजर

अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग-913 (NH-913) के नाम से जाना जाता है। इसकी योजना राज्य के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क मजबूत करने के लिए बनाई गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) की परियोजना सूची में इसके अलग-अलग हिस्सों के निर्माण कार्य दर्ज हैं। उदाहरण के लिए, तुतिंग-जिदो खंड के 13.08 किलोमीटर हिस्से के लिए मार्च 2029 की निर्धारित पूर्णता तिथि दर्ज है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे हाईवे का निर्माण उसी तारीख तक पूरा होने की पुष्टि हो गई है। 

सुरक्षा के साथ स्थानीय विकास भी महत्वपूर्ण

अरुणाचल प्रदेश में बेहतर सड़क संपर्क का असर सीमा सुरक्षा से आगे भी जाता है। दूरस्थ गांवों तक पहुंच, आपात स्थिति में राहत और बचाव, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच तथा व्यापार और पर्यटन के अवसरों में सुधार इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।

हालांकि, सड़क नेटवर्क का विस्तार अपने आप में पूरी तैयारी की गारंटी नहीं है। कठिन मौसम, भूस्खलन, पुलों का रखरखाव, संचार व्यवस्था और वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता भी सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क बनाए रखने के लिए अहम हैं।

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