देहरादून: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद सार्वजनिक होने के बाद मामला और गरमा गया है। मंत्री की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर अपनी बात रखी। उन्होंने शिकायत को कथित तौर पर एआई से तैयार फर्जी ऑडियो क्लिप पर आधारित बताते हुए मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो जारी कर 200 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप
गिरधारी लाल साहू ने वीडियो में रेखा आर्य पर कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार से संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्री के खिलाफ उनकी शिकायत के आधार के रूप में इस्तेमाल की गई ऑडियो क्लिप फर्जी है और एआई की मदद से तैयार की गई है।
वीडियो में साहू ने मंत्री के राजनीतिक सफर को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि उनकी सफलता में उनकी भूमिका रही है। हालांकि, भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्य सामने आने की पुष्टि नहीं है।
एफआईआर वापस लेने की मांग
गिरधारी लाल साहू ने अपने खिलाफ दर्ज शिकायत को गलत बताते हुए एफआईआर वापस लेने की मांग की। वीडियो में उन्होंने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि यदि शिकायत वापस नहीं ली गई तो बाबा बनखंडी नाथ उन्हें माफ नहीं करेंगे।
मंत्री ने जताई जान का खतरा होने की आशंका
दूसरी ओर, रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर ऑडियो क्लिप और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनके पति एक महिला के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच सकते हैं। मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस की मदद ली है।
मामले में दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दावों की सच्चाई जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
विवाद के बीच गिरधारी लाल साहू की पहली पत्नी से उनके बेटे रिंकू साहू का भी जिक्र सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी 2022 में गिरधारी लाल साहू ने रिंकू को अपना बेटा बताया था। रिंकू साहू बरेली में साहू समाज से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय बताए गए हैं। उनके खिलाफ एक सम्मेलन में बिना अनुमति भीड़ जुटाने के आरोप में एफआईआर दर्ज होने की खबरें भी सामने आई थीं।
फिलहाल, मंत्री और उनके पति के बीच विवाद में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस जांच से जुड़े आधिकारिक तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

