तुर्किये से भारत लाया गया नवप्रीत सिंह, फर्जी पहचान से चला रहा था ड्रग नेटवर्क

 

 

 

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के मामले में वांछित नवप्रीत सिंह को तुर्किये से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए भारतीय एजेंसियों की सफलता की सराहना की।

गृह मंत्रालय के मुताबिक नवप्रीत सिंह ने तुर्किये में ‘नवाब विर्क’ नाम की कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर नागरिकता हासिल की थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी से जुड़ा रहा। भारतीय एजेंसियों ने उसकी पहचान का पता लगाया और तुर्किये से उसे वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की।

भारत लौटने के बाद उसे ड्रग तस्करी और अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसियां उसके कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

विदेश में छिपकर चला रहा था नेटवर्क

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार नवप्रीत सिंह पर भारत में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई चल रही थी। तुर्किये में दूसरी पहचान के जरिए रहने के बावजूद भारतीय एजेंसियों ने उसकी वास्तविक पहचान स्थापित करने में कामयाबी हासिल की।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को एजेंसियों के समन्वित प्रयास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2029 से पहले हर नार्को-कार्टेल को खत्म करना है। यह सरकार का घोषित लक्ष्य है; इसका स्वतंत्र आकलन अलग विषय है।

2019 से 288 भगोड़े भारत लौटे

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से अगस्त 2026 तक 36 देशों से कुल 288 भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है। सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और कूटनीतिक प्रयासों को अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है।

https://x.com/AmitShah/status/2106239879650967959?s=20

BHARATPOL से एजेंसियों के बीच समन्वय

भारत ने जनवरी 2025 में BHARATPOL प्लेटफॉर्म शुरू किया था। PIB के अनुसार इस सिस्टम से केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की 1,400 से अधिक यूनिट जुड़ी हैं। सरकार का कहना है कि इससे CBI और दूसरी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में लगने वाला समय कम हुआ है।

गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों से जुड़ी ₹17,874 करोड़ की संपत्तियां PMLA के तहत अटैच की गईं। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं और जुलाई 2026 तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी दी गई है।

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