चीन का HGV हथियार तैयार, हजारों किमी दूर ‘आसमान के टैंकर’ भी निशाने पर

 

 

 

 

TMP: चीन ने हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) तकनीक को सैन्य क्षमता में शामिल करने का दावा किया है। आवाज की रफ्तार से कम से कम पांच गुना तेज उड़ने वाली यह तकनीक रॉकेट से अलग होने के बाद दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रडार से पकड़ना और रोकना मुश्किल हो जाता है।

चीन ने इसे DF-17 मिसाइल पर तैनात किया है, जिसकी मारक क्षमता 2,400 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। इससे गुआम स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने इसकी पहुंच में आ सकते हैं। वहीं, DF-27 से लॉन्च किए जाने पर इसकी संभावित रेंज करीब 8,000 किलोमीटर तक बताई गई है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा खतरा उन अमेरिकी विमानों को माना जा रहा है जो युद्ध के दौरान पीछे रहकर सैन्य अभियानों को सहायता देते हैं। इनमें हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर, AWACS और कमांड पोस्ट विमान शामिल हैं।

हालांकि, इतनी लंबी दूरी से किसी चलते हुए विमान को निशाना बनाना आसान नहीं है। मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में 20 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता है और इस दौरान विमान अपनी स्थिति बदल सकता है। इसके अलावा लक्ष्य की जानकारी सेंसर से मिसाइल तक पहुंचाने वाला संचार नेटवर्क भी हैकिंग या जैमिंग का शिकार हो सकता है।

पेंटागन के आंकड़ों के मुताबिक चीन की रॉकेट फोर्स दुनिया की सबसे बड़ी और विविध मिसाइल सेनाओं में शामिल है। 2015 के मुकाबले उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या में करीब 147 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।

चीन की बढ़ती हाइपरसोनिक क्षमता के जवाब में अमेरिका भी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। AIM-424 और AIM-260 जैसे हथियारों का विकास और परीक्षण इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

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