उत्तराखंड में ड्रग्स के खिलाफ सख्ती, सप्लाई चेन तोड़ने और डी-एडिक्शन सेंटर बढ़ाने के निर्देश

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड में नशे के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय नेशनल कोऑर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट (NCORD) की 12वीं बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने, नशा मुक्ति सेवाओं को मजबूत करने और जागरूकता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जिलों में एनकॉर्ड की बैठकों का नियमित आयोजन सुनिश्चित करने और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक मात्रा में पकड़े गए नशीले पदार्थों के मामलों की लगातार निगरानी की जाए ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। साथ ही पुलिस विभाग को ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए ठोस रणनीति अपनाने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिए कि जो नशा मुक्ति केंद्र किसी कारणवश बंद हैं, उन्हें जल्द संचालित किया जाए। जिला अस्पतालों में डी-एडिक्शन सेंटर के लिए अलग बेड आरक्षित करने के साथ मेडिकल कॉलेजों और उप जिला अस्पतालों में भी ऐसी सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए डी-एडिक्शन सेंटर स्थापित करने में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी।

बैठक में निजी नशा मुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निजी डी-एडिक्शन सेंटरों का निरीक्षण कर मानकों के अनुरूप उनका पंजीकरण और प्रमाणन अनिवार्य रूप से कराया जाए।

मुख्य सचिव ने युवाओं और स्कूली बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग क्लब बनाने तथा स्कूल-कॉलेजों के 100 मीटर दायरे में गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले उत्पादों की बिक्री पर सख्ती से रोक लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य में मादक पदार्थों के उपयोग पर विस्तृत सर्वे कराने की आवश्यकता भी बताई, ताकि नशे के नेटवर्क की सही तस्वीर सामने आ सके और प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।

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