बारूद ने छीना पैर, हौसले ने दिलाया गोल्ड… कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सोमन राणा ने रचा इतिहास

photo - PTI

 

 

 

नई दिल्ली:  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारत के लिए यादगार साबित हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी। महिला मुक्केबाजों के बाद पैरा एथलेटिक्स में सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत के अभियान को नई ऊंचाई दी।

पुरुषों की F57 शॉट पुट स्पर्धा में सोमन राणा ने 13.40 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके पहले प्रयास में 13.38 मीटर और दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का थ्रो रहा। इस जीत के साथ भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई।

देश की रक्षा करते हुए गंवाया था पैर

बिहार के गया जिले के रहने वाले सोमन राणा का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल है। साधारण किसान परिवार से आने वाले सोमन वर्ष 2001 में भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए। खेलों के प्रति उनका जुनून उन्हें सेना की बॉक्सिंग टीम तक ले गया, लेकिन वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर ड्यूटी के दौरान लैंडमाइन विस्फोट ने उनकी जिंदगी बदल दी।

इस हादसे में उनका एक पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। हालांकि, इस कठिन परीक्षा ने उनके इरादों को कमजोर नहीं किया।

हार नहीं मानी, खेल बना नई पहचान

पुनर्वास के दौरान पुणे स्थित आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर में सोमन का रुझान पैरा खेलों की ओर बढ़ा। वर्ष 2017 में उन्होंने आर्मी पैरालंपिक कार्यक्रम से जुड़कर नई शुरुआत की और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स और विश्व पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भी पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक उनके शानदार सफर का एक और स्वर्णिम अध्याय बन गया है।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

सोमन राणा की उपलब्धि सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। देश की रक्षा करते हुए गंभीर चोट झेलने वाले इस सैनिक ने खेल के मैदान में भी भारत का तिरंगा सबसे ऊंचा लहराकर करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया।

 
 
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