पंजाब की ‘बड़ी बहन’ क्यों कहलाती है सतलुज? जानिए इस ऐतिहासिक नदी का अनसुना सफर

 

 

 

 

TMP: पंजाब को ‘पांच नदियों की धरती’ कहा जाता है। सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम मिलकर इस राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बनाती हैं। लेकिन इन पांचों नदियों में सतलुज को ‘बड़ी बहन’ कहा जाता है। इन दिनों पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म का नाम भी ‘सतलुज’ होने के कारण यह नदी फिर चर्चा में है।

कहां से निकलती है सतलुज?

सतलुज नदी का उद्गम तिब्बत में माउंट कैलाश के निकट राक्षसताल झील के आसपास माना जाता है। यहां से निकलकर यह नदी तिब्बती पठार को पार करती हुई हिमाचल प्रदेश के शिपकी ला दर्रे से भारत में प्रवेश करती है। इसके बाद यह किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और पंजाब से गुजरते हुए पाकिस्तान पहुंचती है, जहां आगे चलकर सिंधु नदी तंत्र का हिस्सा बन जाती है।

नेपाल क्यों नहीं पहुंचता इसका पानी?

अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब सतलुज का उद्गम कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र के पास है तो इसका पानी नेपाल में क्यों नहीं जाता?

इसका जवाब पूरी तरह भौगोलिक संरचना में छिपा है। कैलाश-मानसरोवर क्षेत्र एशिया का एक महत्वपूर्ण वॉटर डिवाइड (जल विभाजक क्षेत्र) है। यहां से निकलने वाली नदियां जमीन के प्राकृतिक ढलान के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में बहती हैं।

सतलुज के उद्गम क्षेत्र का ढलान पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम की ओर है, इसलिए यह नदी हिमाचल होते हुए पंजाब और फिर पाकिस्तान की ओर बहती है। जबकि नेपाल की ओर जाने वाली नदियों का ढलान दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिशा में है। यही वजह है कि सतलुज का जल नेपाल में प्रवेश नहीं करता।

सिंधु नदी तंत्र की अहम कड़ी

करीब 1,450 किलोमीटर लंबी सतलुज नदी सिंधु नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। यह उन चुनिंदा ट्रांस-हिमालयी नदियों में शामिल है जो तिब्बती पठार से निकलकर हिमालय को पार करती हैं। इस श्रेणी में सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र प्रमुख नदियां हैं।

भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

1960 की सिंधु जल संधि के तहत सतलुज, ब्यास और रावी के जल पर भारत का अधिकार है। यही कारण है कि सतलुज का पानी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्राकृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व और देश की जल सुरक्षा में योगदान के कारण सतलुज सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि उत्तर भारत की जीवनरेखा मानी जाती है।

 
(Visited 1 times, 1 visits today)