Gopeshwar: चमोली जिले की दुर्गम Niti Valley इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार हो रही है। यहां स्थित Timmarsain Mahadev में बनने वाले प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग, जिन्हें स्थानीय लोग “बाबा बर्फानी” के रूप में श्रद्धा से पूजते हैं, उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
नीती घाटी तक जाने वाला हाईवे सुचारू होने के बाद क्षेत्र में आवाजाही बढ़ी है। इसके चलते यहां रहने वाली भोटिया जनजाति के लोग भी धीरे-धीरे अपने मूल गांवों की ओर लौटने लगे हैं। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से स्थानीय लोगों को छोटे-मोटे व्यवसाय और सेवाओं के जरिए रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में फिर से रौनक लौट आई है।
सर्दियों में बर्फ देखने के लिए आमतौर पर पर्यटक Auli का रुख करते हैं, लेकिन इस बार वहां पर्याप्त बर्फ न होने के कारण लोग Gurso Bugyal पहुंच रहे हैं। औली से लगभग तीन किलोमीटर के ट्रेक के बाद गौरसों पहुंचा जा सकता है। हालांकि यहां भी अब बर्फ सीमित मात्रा में ही बची है, इसलिए कई पर्यटक अपनी यात्रा में नीती घाटी स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन को भी शामिल कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि गुफा के भीतर बनने वाला प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग अब धीरे-धीरे पिघलने लगा है, लेकिन गुफा और उसके आसपास मौजूद बर्फीला वातावरण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अलग ही अनुभव दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस शीतकाल में अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु नीती घाटी पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। सामान्यतः सर्दियों के मौसम में भोटिया जनजाति के लोग निचले इलाकों में चले जाते हैं, लेकिन इस बार यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

