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ईरान में सत्ता का अंत और नई शुरुआत: अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित

 

 

 

 

TMP: ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के निधन की आधिकारिक पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने कर दी है। 1989 से इस्लामिक गणराज्य की बागडोर संभाल रहे 86 वर्षीय खामेनेई की मृत्यु को मध्य-पूर्व की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। सरकारी प्रसारण में उनके निधन को “शहादत” बताया गया है और देशभर में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है, साथ ही सात दिन की सार्वजनिक छुट्टियाँ भी घोषित की गई हैं।

रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि हालिया क्षेत्रीय तनाव के बीच इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में वे मारे गए। हालांकि इन हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

सत्ता का केंद्र रहा एक चेहरा

खामेनेई न केवल राजनीतिक प्रमुख थे, बल्कि धार्मिक और सैन्य मामलों में भी अंतिम निर्णयकर्ता माने जाते थे। उनकी भूमिका ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रणनीति तय करने में निर्णायक रही। उनके निधन की खबर ने वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और भू-राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाएँ तेज हो गई हैं।

परिवार और संभावित उत्तराधिकार

खामेनेई का परिवार बड़ा है। उनके चार बेटे—मुस्तफा, मोजतबा, मसूद और मायसम—और दो बेटियाँ—होदा और बुशरा—बताई जाती हैं। उनके दूसरे पुत्र मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है, हालांकि इस पर कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

अब आगे क्या? समझिए संवैधानिक प्रक्रिया

ईरान के संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता का चयन “विलायत-ए-फकीह” सिद्धांत के तहत होता है। इस प्रक्रिया को Assembly of Experts संचालित करती है, जिसमें वरिष्ठ धर्मगुरुओं की परिषद शामिल होती है। यह निकाय नए सर्वोच्च नेता का चुनाव करता है, बशर्ते वह धार्मिक और राजनीतिक रूप से योग्य शिया धर्मगुरु हो।

संभावित नामों में जिन व्यक्तियों की चर्चा तेज है, उनमें शामिल हैं:

  • Mojtaba Khamenei

  • Hassan Khomeini

  • Alireza Arafi

  • Mohsen Araki

  • Gholam-Hossein Mohseni-Ejei

हालांकि इन नामों को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय विशेषज्ञों की सभा ही करेगी।

अंदरूनी असंतोष और बाहरी दबाव

खामेनेई के कार्यकाल के अंतिम वर्षों में आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दों को लेकर देश में व्यापक असंतोष देखा गया। हालिया महीनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएँ भी बढ़ी थीं। ऐसे माहौल में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

वैश्विक असर की आशंका

विश्लेषकों का मानना है कि सर्वोच्च नेतृत्व में बदलाव ईरान की विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है। विशेषकर इजरायल और अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव बढ़ने या नई कूटनीतिक दिशा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।

ईरान में सत्ता परिवर्तन केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि धार्मिक और रणनीतिक आयामों से जुड़ा होता है। ऐसे में आने वाले सप्ताह न केवल तेहरान, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहों के केंद्र में रहेंगे।

 
 
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