देहरादून: CM धामी के निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राज्य में आपदा जोखिम को न्यूनतम करने की दिशा में लगातार तकनीकी सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य मौसम और संभावित आपदाओं की समय रहते सटीक जानकारी उपलब्ध कराकर जनहानि और संपत्ति नुकसान को कम करना है। इसी कड़ी में आने वाले कुछ महीनों में राज्य के विभिन्न जनपदों में आधुनिक तकनीक आधारित उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि रक्षा भू-स्थानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) द्वारा राज्य के 10 जनपदों में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) लगाए जाएंगे। इनमें उत्तरकाशी और टिहरी जनपद में सर्वाधिक आठ-आठ एडब्ल्यूएस स्थापित किए जाने हैं। पौड़ी में सात, देहरादून में पांच, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में तीन-तीन, अल्मोड़ा में दो तथा नैनीताल और हरिद्वार में एक-एक एडब्ल्यूएस लगाए जाएंगे। इन उपकरणों से मौसम से जुड़ा डेटा रियल टाइम में उपलब्ध होगा, जिससे समय रहते चेतावनी जारी करना संभव हो सकेगा।
इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत और चमोली में से चयनित तीन जनपदों में डॉप्लर रडार स्थापित किए जाने की योजना है। डॉप्लर रडार से वर्षा, बादल और मौसम की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। संबंधित जिलों को भूमि चयन कर शीघ्र प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
शनिवार को राज्य के सभी 13 जनपदों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन ने विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने भारत सरकार के एनडीएमआईएस पोर्टल पर आपदा मद में किए गए व्यय का पूरा विवरण समयबद्ध रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में आपदाओं के दौरान लापता व्यक्तियों को मृत घोषित किए जाने से जुड़े लंबित मामलों पर भी चर्चा की गई। सचिव श्री सुमन ने निर्देश दिए कि ऐसे सभी प्रकरणों के प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजे जाएं, जिससे प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके। वर्ष 2025 की आपदाओं में मृत नेपाली मूल के नागरिकों को आर्थिक सहायता और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। जनपदों को ऐसे सभी लंबित मामलों की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि केंद्र सरकार स्तर पर आवश्यक कार्यवाही की जा सके।
हर उपकरण की होगी जीआईएस मैपिंग
राज्य में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध सभी उपकरणों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। सचिव आपदा प्रबंधन ने सभी जनपदों और विभागों को आईडीआरएन पोर्टल पर उपकरणों का विस्तृत विवरण शीघ्र अपलोड करने के निर्देश दिए। मानसून से पहले यह प्रक्रिया पूरी होने पर आपदा के समय संसाधनों की त्वरित पहचान संभव होगी।
हर जिले में बनेगा डीडीआरएन नेटवर्क
आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रुद्रप्रयाग मॉडल पर अन्य जनपदों में भी डिजास्टर डेडिकेटेड रेडियो नेटवर्क (डीडीआरएन) स्थापित किया जाएगा। यह नेटवर्क आपदा की स्थिति में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने पर भी प्रशासन और राहत एजेंसियों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगा।
तहसील स्तर तक पहुंचेगा आपदा प्रबंधन
राज्य में आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए तहसील स्तर पर भी आपातकालीन परिचालन केंद्र (टीईओसी) स्थापित किए जाएंगे। राज्य और जनपद स्तर पर कार्यरत एसईओसी व डीईओसी की तर्ज पर टीईओसी से त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय संभव होगा। इसके लिए तहसीलों को आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर ही राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें।
बैठक में वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ. बिमलेश जोशी सहित विभिन्न विशेषज्ञ और अधिकारी उपस्थित रहे।
