देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में उत्तराखंड मेट्रो रेल, शहरी बुनियादी ढांचा एवं भवन निर्माण निगम लिमिटेड (यूकेएमआरसी) के निदेशक मंडल की 35वीं बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में यूकेएमआरसी द्वारा प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा करते हुए बोर्ड ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
बैठक के दौरान ई-बीआरटीएस/ई-बस संचालन हेतु डेडीकेटेड एलीवेटेड कॉरिडोर के निर्माण प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। हालांकि मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस कॉरिडोर को केवल टू लेन के बजाय फोर लेन (दो लेन ई-बीआरटीएस/ई-बस संचालन के लिए तथा दो लेन सामान्य बसों के लिए) बनाए जाने की व्यवहार्यता का परीक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पहले से उपलब्ध रहे।
मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत पार्किंग की आवश्यकता और स्थानों की विस्तृत योजना तैयार की जाए। इसके साथ ही बिंदाल एवं रिस्पना एलीवेटेड रोड के अलाईनमेंट को प्रस्तावित कॉरिडोर में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जंक्शनों पर किसी प्रकार की तकनीकी खामी न रहे।
प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से अधीक्षण अभियंता, देहरादून को सम्पूर्ण परियोजना का नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए, जिससे यूकेएमआरसी और पीडब्ल्यूडी के बीच बेहतर समन्वय के साथ परियोजना को अंतिम रूप दिया जा सके।
बैठक में हर की पैड़ी से चंडीदेवी रोपवे के लिए निविदा प्रक्रिया प्रारम्भ करने तथा निजी भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की स्टेज-वन स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही निविदा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, बृजेश कुमार संत, अपर सचिव विनीत कुमार, यूकेएमआरसी के बृजेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
