रुड़की: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कन्हैया लाल डीएवी महाविद्यालय, रुड़की में आयोजित सम्मान समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की भूमिका और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की नीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज की चेतना को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। जिस समाज में शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और संतुष्ट होता है, वही समाज प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए उन्नति के शिखर को छूता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू कर उत्तराखंड ने अपनी स्पष्ट प्राथमिकता दिखाई है। इसके तहत विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। साथ ही छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब और नए परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के साथ शेवनिंग उत्तराखंड छात्रवृत्ति के लिए समझौता किया गया है, जिसके तहत राज्य के 5 मेधावी विद्यार्थियों को मास्टर्स की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन भेजा जाएगा। देश के शीर्ष 100 रैंकिंग संस्थानों में प्रवेश पाने वाले युवाओं को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि उत्तराखंड का युवा केवल नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बने। इसके लिए महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है और 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में कार्य हो रहा है। उत्कृष्ट शोध पत्रों के प्रकाशन पर विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं।
नकल के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून उत्तराखंड में लागू किया गया है। अब तक 100 से अधिक नकल माफिया जेल भेजे जा चुके हैं। बीते साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियाँ मिली हैं, जो राज्य गठन के बाद किसी भी सरकार द्वारा दी गई कुल नियुक्तियों से कहीं अधिक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। 1 जुलाई 2026 के बाद राज्य में केवल वही मदरसे संचालित होंगे, जो सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक सिलेबस का पालन करेंगे, अन्यथा उन्हें बंद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना शैक्षिक योग्यता के केवल धार्मिक आधार पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर भी सख्त नियंत्रण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि सभी शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण और मानक आधारित शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, विधायक प्रदीप बत्रा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्रपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
