देहरादून: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आए अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर सरकार का पक्ष रखा। वहीं, मंत्री के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास इस प्रकरण से जुड़ा कोई ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य है तो वह जांच एजेंसियों या पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करे। सरकार और पुलिस लगातार अपील कर रही है कि आरोप लगाने के बजाय सबूत सामने लाए जाएं, ताकि उनकी विधिसम्मत जांच की जा सके।
मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने प्रेस वार्ता कर चुनौती देने की कोशिश की है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार ने आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल रखी है। गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने देखने और सुनने की क्षमता बंद कर ली है, जबकि बोलने में कोई कमी नहीं है।
गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले में साक्ष्य नष्ट किए जाने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार और उसके प्रभावशाली लोगों पर बनती है। उन्होंने कहा कि यदि सही तरीके से जांच की जाए तो सबूत उन्हीं लोगों से सामने आएंगे, जिन पर सत्ता का संरक्षण रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रिजॉर्ट में सबूत मिटाने में कौन अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल थे, क्या यह बात सरकार को नहीं मालूम है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को बेवजह के स्पष्टीकरण देने के बजाय इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई से करानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऊंची आवाज में बोलने से सच साबित नहीं होता, सच्चाई यह है कि सरकार को कथित वीआईपी की पहचान मालूम है, लेकिन सबूत मिटाए जाने के बाद अब जानबूझकर प्रमाण मांगने की चुनौती दी जा रही है।
पूरा मामला संक्षेप में
पौड़ी जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं और कुछ दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। जांच में यह सामने आया कि अंकिता की हत्या की गई थी।
इस मामले में वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारी—सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता—को आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि अंकिता पर ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया गया था, जिसे उसने ठुकरा दिया। इसके बाद हुए विवाद में तीनों ने मिलकर अंकिता को नहर में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, पुलकित आर्य ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
यह मामला एक बार फिर चर्चा में तब आया, जब उर्मिला सनावर नामक महिला ने एक वीडियो जारी कर कथित वीआईपी के नाम का दावा किया। उर्मिला का कहना है कि वही व्यक्ति वह वीआईपी है, जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था।

