चंपावत में गुलदार का खौफ कायम, शाम होते ही घरों में सिमट रहे लोग

 

 

 

 

चंपावत: बाराकोट ब्लॉक के धरगढ़ा, च्यूरानी और मिर्तोली गांवों में गुलदार की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में शायद ही कोई दिन ऐसा बीत रहा हो, जब गुलदार दिखाई न दे या रात के सन्नाटे में उसकी गुर्राहट सुनाई न दे। हालात यह हैं कि सूर्यास्त के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।

गुरुवार शाम च्यूरानी गांव में एक महिला खेत के पेड़ पर चढ़कर चारा काट रही थी। तभी उसने नीचे के खेत में गुलदार को बैठे देखा। महिला के शोर मचाते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सामूहिक हल्ला कर गुलदार को जंगल की ओर खदेड़ा। इसी गांव के धरगढ़ा तोक में कुछ समय पहले गुलदार एक व्यक्ति की जान ले चुका है, जिससे दोबारा गुलदार दिखने से दहशत और गहरा गई है।

महिलाओं और बच्चों में बढ़ा डर

भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह बोहरा ने बताया कि च्यूरानी और आसपास के इलाकों में गुलदार लगातार सक्रिय है। वन विभाग द्वारा एक गुलदार को पहले ही पिंजरे में पकड़ा जा चुका है, लेकिन खतरा टला नहीं है। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे धरगढ़ा गांव की महिलाएं जब जंगल में चारा लेने गईं, तो उन्हें पास ही गुलदार बैठा दिखाई दिया। महिलाओं ने पटाखे फोड़े और शोर मचाया, जिसके बाद गुलदार जंगल की ओर भाग गया।

इससे एक दिन पहले नाकोट क्षेत्र के टाकला गांव में स्कूल जाते समय बच्चों के पीछे गुलदार के दौड़ने की घटना भी सामने आई थी, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।

वन विभाग अलर्ट, गश्त तेज

वन विभाग ने गांवों और स्कूलों के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। रेंजर आर.के. जोशी ने बताया कि जिस स्थान पर गुलदार ने स्कूली बच्चों का पीछा किया था, वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है। गुलदार प्रभावित अन्य इलाकों में भी लगातार गश्त की जा रही है। च्यूरानी गांव में पेड़ पर चढ़ी महिला को गुलदार दिखने की सूचना पर भी विभाग ने मौके पर निगरानी बढ़ाई है। लोगों को सावधानी बरतने और जागरूक रहने की सलाह दी जा रही है। रेंजर एन.डी. पांडे भी अपनी टीम के साथ क्षेत्र में नियमित गश्त कर रहे हैं।

आबादी की ओर क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार?

  • आसान शिकार की तलाश: बस्तियों में कुत्ते, बकरियां जैसे पालतू जानवर गुलदार के लिए आसान शिकार बन जाते हैं।

  • जंगल में शिकार की कमी: जब हिरण, सूअर और बंदर जैसे प्राकृतिक शिकार कम होते हैं, तो गुलदार भोजन की तलाश में गांवों की ओर बढ़ते हैं।

  • पानी और छिपने की जरूरत: सूखे या अधिक वर्षा के समय गुलदार पानी और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में मानव बस्तियों के नजदीक आ जाते हैं।

  • घटता वन क्षेत्र: जंगलों के सिकुड़ने और मानव गतिविधियों के बढ़ने से गुलदार का प्राकृतिक आवास सीमित हो रहा है।

  • बरसात में बढ़ी सक्रियता: बारिश के मौसम में गुलदार ज्यादा सक्रिय रहते हैं और गांवों के आसपास दिखने लगते हैं।

  • संख्या में बढ़ोतरी: गुलदारों की संख्या बढ़ने पर जंगल में भोजन का दबाव बढ़ता है, जिससे वे आबादी की ओर रुख करते हैं।

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