कुरुक्षेत्र : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया दिव्य उपदेश ही श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में मानवता का शाश्वत ज्ञान बनकर पूरे विश्व को दिशा दिखा रहा है। इसी भूमि से धर्म, कर्तव्य, सत्य, निष्काम कर्म और आत्मोन्नति का संदेश सम्पूर्ण मानव समाज में प्रवाहित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के माध्यम से गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हरियाणा सरकार एवं स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की कालजयी मार्गदर्शिका है। यह ऐसा दिव्य प्रकाशपुंज है, जिसमें मनुष्य के आचरण, चिंतन, कर्तव्य, भक्ति, ज्ञान और जीवन व्यवहार का अद्वितीय संकलन है। उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही गीता का अनुसरण करते आ रहे हैं। पहले वे गीता के सार कथनों के माध्यम से इसे समझते थे, लेकिन आज वे अपने प्रत्येक निर्णय, कर्म और जीवन के हर मोड़ पर गीता के उपदेशों को मार्गदर्शक के रूप में अपनाते हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए किया गया कार्य ही सबसे बड़ा धर्म है। यही संदेश उन्हें व्यक्तिगत लाभ, स्वार्थ और अहंकार से ऊपर उठकर निष्काम भाव से समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवता की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक युग में भौतिकता की अंधी दौड़ के कारण मानव जीवन जब जटिल और तनावपूर्ण हो गया है, तब गीता का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। गीता के 18 अध्याय हमें किसी न किसी योग की शिक्षा प्रदान करते हैं और जीवन को संतुलित, उद्देश्यपूर्ण तथा उच्चतम नैतिक आदर्शों के अनुरूप ढालने का शाश्वत मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज विश्व के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में गीता पर शोध हो रहे हैं और दुनियाभर में इसे लीडरशिप, मैनेजमेंट और आत्मशांति के ग्रंथ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। गीता से हमें न केवल जीवन जीने की कला मिलती है, बल्कि हर चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणा भी मिलती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन गीता श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। आज हमारे गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर गर्व है। आज हमारी सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में गर्व से लहरा रही है और भारत अपनी जड़ों से जुड़ते हुए पुनः विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संपूर्ण देशवासियों के लिए आस्था, विश्वास और संस्कृति का पवित्र केंद्र है। देवभूमि के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कठोर कानून लागू किया है। इसके साथ ही राज्य में सख्त दंगारोधी कानून बनाया गया है। उन्होंने बताया कि 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। देश में सबसे पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की स्थापना की गई है।
