लोक-संगीत से राजनीति तक: अलीनगर में मैथिली ठाकुर की नई पारी, क्या सुरों की यह साधिका जनता का दिल जीत पाएगी?

 

 

 

 

दरभंगा: भजन और लोक-संगीत से घर-घर में पहचान बना चुकीं मैथिली ठाकुर अब सुरों से आगे बढ़कर राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी शुरू कर रही हैं। अलीनगर विधानसभा सीट से उन्होंने इस बार चुनावी दस्तक दी है, जहां मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। नामांकन के अंतिम दिन कुल 13 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया, लेकिन चर्चा का केंद्र बनी रहीं केवल मैथिली ठाकुर।

25 वर्षीय मैथिली ठाकुर का सामना राजद के विनोद मिश्रा, जनसुराज पार्टी के विप्लव चौधरी और आम आदमी पार्टी के राजीपाल झा से है। पहली बार राजनीति में उतर रहीं मैथिली अपने गायन और लोकप्रियता के कारण चुनावी क्षेत्र में खासा उत्साह पैदा कर रही हैं।

लोक-संगीत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए जानी जाने वाली मैथिली को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों प्रशंसक हैं — यही वजह है कि अब उनके समर्थक संगीत की तरह राजनीति में भी “तालमेल” बिठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 1.80 लाख रुपये नकद, दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत के वाहन और आभूषण, तथा लगभग 1.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। दिलचस्प बात यह है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज से स्नातक मैथिली मूल रूप से मधुबनी जिले की रहने वाली हैं। नामांकन से पहले उन्होंने अलीनगर में एक रैली निकालते हुए कहा,

“मैंने अलीनगर को एक आदर्श शहर बनाने का संकल्प लिया है।”

अब सवाल यह है कि क्या उनके सुरों की मिठास और लोकप्रिय छवि राजनीति की कड़वी सच्चाइयों में भी उतनी ही असरदार साबित होगी?

अलीनगर की जनता तय करेगी कि लोक-संगीत की यह साधिका अब “जन-संगीत” में कितना ताल मिला पाती हैं।

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