- चाबहार पर ट्रंप का वार
- भारत की रणनीतिक पहुंच पर संकट
नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक नया तनाव जुड़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 से लागू वह विशेष छूट वापस ले ली है, जिसके तहत भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापार और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए करता आ रहा था। यह छूट 29 सितंबर 2025 से खत्म हो जाएगी, जिसके बाद इस परियोजना से जुड़े लोग अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि विदेश मंत्री द्वारा दी गई यह छूट अब रद्द कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी’ का हिस्सा है।
क्यों अहम है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्व में ओमान की खाड़ी पर स्थित है। यह ईरान का एकमात्र गहरे पानी का बंदरगाह है और भारत, अफगानिस्तान व मध्य एशिया के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत इसे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का अहम हिस्सा मानता है, जो रूस और यूरोप को मध्य एशिया के रास्ते जोड़ता है।
भारत ने इस बंदरगाह से कई बार मानवीय सहायता भेजी है। वर्ष 2023 में भारत ने यहां से अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं भेजा था, जबकि 2021 में ईरान को कीटनाशक दवाइयों की आपूर्ति की गई थी। चाबहार की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के बेहद करीब है।
भारत पर असर
छूट खत्म होने के बाद भारत की अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच कठिन हो जाएगी। अब तक भारत चाबहार के जरिए पाकिस्तान को बायपास कर व्यापार करता था। इस रास्ते के बंद होने से भारत को नए विकल्प तलाशने होंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से भारत की क्षेत्रीय कूटनीति पर सीधा असर पड़ेगा और ईरान के साथ आर्थिक सहयोग भी प्रभावित हो सकता है। ट्रंप का यह कदम साफ संकेत है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए किसी को भी रियायत देने को तैयार नहीं है — चाहे वह भारत ही क्यों न हो।
