देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि “अगला दशक तभी उत्तराखंड का होगा, जब हम मोदी-धामी के हाथों को मजबूत करेंगे।”
संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में कोश्यारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार वर्षों में उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त खड़ी की है। धामी की सबसे बड़ी ताकत उनका विनम्र व्यवहार है, जिसकी सराहना विपक्षी भी करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में कठोर शब्दों से बचना मुश्किल होता है, लेकिन सीएम धामी को किसी ने कठोर बोलते नहीं देखा।
कार्यक्रम में विभिन्न कुलपतियों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने धामी सरकार की नीतियों पर विचार रखे।
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प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का साहसिक कदम उत्तराखंड ने उठाया है।
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प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन की सराहना की।
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प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि अगले साल तक देश की पांचवीं साइंस सिटी उत्तराखंड को मिलेगी।
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प्रो. गोविंद सिंह ने नकल विरोधी सख्त कानून को ऐतिहासिक बताया।
साहित्य, कला और खेल के क्षेत्र में उठाए गए कदमों की भी चर्चा हुई। हिंदी अकादमी दिल्ली के पूर्व सचिव डा. हरिसुमन बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है जहां कलाकारों और साहित्यकारों को 1 से 5 लाख रुपये तक का सम्मान राशि दी जा रही है। वहीं, प्रवासी परिषद के उपाध्यक्ष पूरण चंद्र नैलवाल ने प्रवासी सम्मेलन की पहल को सराहा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मदन मोहन सती की पुस्तक “नायक से जननायक पुष्कर सिंह धामी” का विमोचन भी किया गया।
