उत्तराखण्ड के जल संकट से निपटने की ऐतिहासिक पहल, CM धामी ने शुरू की ‘डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना’

 

 

भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखण्ड में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए सोमवार को एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई। विधानसभा भवन, भराड़ीसैंण में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने स्वामी राम विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सहयोग से “डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना” का शुभारंभ किया।

तकनीक से लौटेगी भूजल में जान

इस योजना के तहत उपचारित वर्षा जल को निष्क्रिय हैंडपंपों में इंजेक्ट कर भूजल स्तर बढ़ाया जाएगा।

  • पहले चरण में ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण और चौखुटिया विकासखंडों के 20 चयनित हैंडपंपों को पुनः क्रियाशील बनाया जाएगा।

  • यह तकनीक स्वामी राम विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा विकसित की गई है।

  • कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम ने विस्तार से बताया कि यह सिस्टम किस तरह वर्षा जल को फिल्टर और ट्रीट कर सीधे भूजल भंडार तक पहुंचाता है, जिससे सूखे हैंडपंप दोबारा जीवंत हो जाते हैं।

मुख्यमंत्री धामी का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने कहा—“राज्य सरकार तकनीकी नवाचारों को अपनाकर जल संकट से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।”

विधानसभा अध्यक्ष का संदेश

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने कहा—“जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की भविष्य की जीवनरेखा है। भूजल पुनर्भरण भविष्य की जल सुरक्षा का आधार बनेगा और यह योजना सतत जल प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”

MoU के बाद मिली रफ्तार

इस परियोजना को लागू करने के लिए 8 जुलाई 2025 को अंतर्राष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भराड़ीसैंण और स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के बीच MoU साइन हुआ था।

कार्यक्रम की खास झलकियां

  • “Vibrant Bird of Kotdwar” फोटो संग्रह का विमोचन।

  • गैरसैंण क्षेत्र में तकनीक के सफल परिणामों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन।

  • कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायकगण, विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह पहल उत्तराखण्ड को जल संकट से उबारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

(Visited 641 times, 1 visits today)